Home मुख्य जाले में दिखी प्रतिमा विसर्जन की अद्भुत मोहक परम्परा। Voice of Darbhanga
मुख्य - October 12, 2016

जाले में दिखी प्रतिमा विसर्जन की अद्भुत मोहक परम्परा। Voice of Darbhanga

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दरभंगा : जिला के जाले स्थित माता जलेश्वरी मन्दिर परिसर में बने दुर्गा मन्दिर से निकली प्रतिमा विसर्जन जुलूस की छटा निराली होती है। जुलूस में भक्तों की भीड़ का आलम ये होता है कि एक किलोमीटर दूर स्थित सुखाय पोखर तक पहुंचने में जुलूस को 24 घंटे लग जाते हैं। परम्परा के अनुसार माँ दुर्गा की विसर्जन जुलूस का आधा रास्ता जहां पुरुष परम्परागत हथियारों के साथ करतब दिखाते ले चलते हैं और वहीं गांव के बीचोबीच बजरंगबली  मन्दिर के पास से हजारो की संख्या में महिलाएं जुलूस को अपने नियंत्रण में लेती हैं। महिलाएं झिझिया नृत्य के साथ विसर्जन जुलूस को विसर्जन स्थल यानी सुखाय पोखर  तक पहुंचाती है। यह परम्परा 1960 से चली आ रही है। स्थानीय महिलाएं 11 या फिर 21 घड़ों को आपस मे मिलाकर झिझिया तैयार करती हैं और उसे लेकर नृत्य व करतब भी करती चलती हैं। साथ ही रास्ते के सभी जलेवार मूल के लोग विसर्जन को जा रही प्रतिमाओं की आरती करते हैं और पुष्पांजलि भी अर्पित करते हैं।
ऐसे में स्वाभाविक है कि जुलूस को रास्ता तय करने में काफी वक्त लग जाता है। मंगलवार को शाम 5 बजे ही माँ दुर्गा  सहित कार्तिक, गणेश, लक्ष्मी, की प्रतिमा को विसर्जित करने जुलूस निकाला गया है और बुधवार दोपहर तक दो तिहाई रास्ता ही सफर किया गया है। बताया गया कि बुधवार 4 -5 बजे तक मूर्तियां विसर्जित हो पाएंगी।

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