Home मुख्य जान बचाकर विदेश से लौटी मेडिकल की छात्रा अपने वतन में पढाई को लेकर खा रही है दर-दर की ठोकर। Voice of Darbhanga
मुख्य - October 15, 2016

जान बचाकर विदेश से लौटी मेडिकल की छात्रा अपने वतन में पढाई को लेकर खा रही है दर-दर की ठोकर। Voice of Darbhanga

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दरभंगा।अभिषेक कुमार
यमन में अलकायदा और ISIS जैसे आतंकवादी के आतंक से जान बचा कर दो सगी बहने मनीषा और लूसी आख़िरकार अपने वतन भारत तो आ गयी, पर अपना भविष्य अन्धकार की ओर जाता देखा पूरा परिवार अब जबर्दस्त मानसिक परेशानी से गुजर रहा है। दरसल दरभंगा की रहने मनीषा और लूसी डॉक्टर बनने का सपना आँखों में पाल दोनों बहने यमन के मेडिकल कालेज में फ़ाइनल ईयर की पढ़ाई कर ही रही थी तभी वहाँ आतंकी संगठन ने ऐसा माहौल पैदा किया की यमन में युद्ध जैसे हालात हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय को यमन छोड़ने का आदेश दिया, जिसके बाद भारतीय दूतावास के निर्देशानुसार आनन फानन में यमन देश को छोड़ बम गोलो और गोलियों की तरतराहट के बीच सभी को अपने वतन भारत लौटना पड़ा। मेडिकल की पढ़ाई को अंतिम पड़ाव में छोड़ 2015 में भारत तो लौट गयी, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद दोनों बहनों को अब तक हिंदुस्तान के किसी मेडिकल कालेज में दाखिला नहीं मिला। अपने भविष्य को लेकर परेशान दोनों बहने बिहार सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक गुहार लगाई पर कोइ फायदा नहीं मिला।थक हार कर दोनों बहनों ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है। क़ानूनी दाव पेच के बीच उलझी मनीषा और लूसी अपनी फरियाद को लेकर नितीश के जनता दरबार में पहुंची। फ़रियाद लगाने के बाद बिहार सरकार के मुखिया नितीश कुमार ने दोनों बहनों को राहत देते हुए बिहार के मेडिकल कालेजो में नामांकन के लिए हामी भर दी। ऐसे में केंद्र सरकार और MCI का रवैया परिवार को चिंता में डाल रहा है वो भी तब जब भारत की यह बेटी इंडो – यमन कल्चरल एक्सचेंज के अंतर्गत स्कालरशिप के तहत यमन में पढ़ाई कर रही थी। जिस देश में पाकिस्तान से आई एक लड़की को हमारे देश के केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने एक कदम आगे बढ़कर पढ़ने का इंतजाम ही नही किया बल्कि उसका कालेज में नामांकन भी कराया और खूब वाह वाही भी बटोरी थी। लेकिन इसके ठीक विपरीत हमारे ही देश की बेटी पढ़ाई के लिए हिंदुस्तान में ही दर दर की ठोकर खा रही है। अब सवाल यह है कि जिस देश के प्रधानमंत्री बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे उसी देश की बेटी को पढ़ने को संघर्ष करना पड़े तो सरकार के कथनी और करनी में फर्क समझा जा सकता है। पूरी तरह टूट चुकी दोनों बहने चारो तरफ निराशा के बाद अब आज वॉइस ऑफ़ दरभंगा के सामने आकर मीडिया के सहारे सरकार से फिर से एक बार मदद मांगने के लिए सामने आई है ताकि उसे न्याय मिले और आगे अपनी पढ़ाई पूरी कर देश को अपनी सेवा दे सके। अपने नम आँखों से सिसकती आवाज़ में बस एक ही सवाल पूछती है आखिर मेरा कसूर क्या है ?

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