
अपर्याप्त इमरजेंसी सुविधा के अभाव में काफी संख्या में होती है ट्रामा से जुडी मौतें। Voice of Darbhanga

दरभंगा: सडक दुर्घटना में हर साल करीब 1 लाख लोगों की मौत हो जाती है। अत्यधिक रक्तस्राव व सटीक आकस्मिक इलाज के अभाव में देश में प्रतिदिन सड़क दुर्घटना में काफी जान गंवाते हैं जिसका कारण सटीक आकस्मिक इलाज का अभाव होना, एंबुलेंस सेवा में देरी, ट्राएज फैसिलिटी में कमी और इक्विप्ड इमरजेंसी केयर स्टाफ की कमी है।
वर्ल्ड ट्रामा डे के अवसर पर पारस ग्लोबल हाॅस्पिटल की ट्रामा टीम ने लोगों को शिक्षित और जागरुक करने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर बताया कि अधिकतर की जान अत्यधिक खून बहने, हास्पीटल पहुॅचने में देरी और इमरजेन्सी यूनिट में उपकरणों की कमी के कारण हो जाती है। ऐसे केस में अधिकतर लोगों की जान समय पर स्पेशियलटी मेडिकल केयर प्रदान कर और ट्राॅमा केयर प्रोटोकोल से बचायी जा सकती है। ट्रामा टीम के डाॅक्टरों ने बताया कि इमरजेंसी मे गोल्डेन आवर का क्या महत्व है। दुर्घटना के तुरंत बाद के महत्वपूर्ण समय जिसमें मरीजों को सटीक मेडिकल केयर व अन्य सुविधा मिल जाए, तो काफी संख्या में लोगों को बचाया जा सकता है।
हर नागरिक को क्या कुछ बातों का ख़ास ख्याल रखना चाहियर। सावधानीपूर्वक सडक नियमों का पालन करना चाहिए एवं वाहन चलाते समय वानिर्गं साइन और ट्रैफिक सिग्नल का ध्यान रखें। टू व्हीलर चलाने में हेलमेट लगाएं, रोड पर मोबाइल और तेज संगीत से दूर रहें।

