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2 weeks ago

विश्वविद्यालय परिसर के जैविक धरोहरों का डीजिटल संरक्षण प्रारंभ।

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के 200 एकड़ में फैले भू-भाग पर जैव विविधता के संरक्षण एवं अध्ययन के उद्देश्य से एक छात्र-केंद्रित प्रोजेक्ट का आज आरंभ हुआ। इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन कुलपति प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा 1 दिसंबर 2020 को हुआ था। कुलपति ने विभागाध्यक्षों को अपने पहले सम्बोधन में ‘आउट आफ बॉक्स ‘ कार्य करने हेतु आह्वान किया था। इसी कड़ी में आज इस कार्य का शुभारम्भ प्रथम समेस्टर के छात्र- छात्राओं द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. रतन कुमार चौधरी ने अपने संबोधन में बताया कि यह क्षेत्र महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह का मुख्य स्थल हुआ करता था। जिसमें कई प्रकार के प्राकृतिक औषधीय गुण के पौधे, जीव-जंतु, मछलियां, सियार, शाही, खड़गोष आदि पारिस्थितिक संतुलन हेतु पाले गए थे। वर्तमान परिदृश्य में इनका आकलन एवं अध्ययन कर कलमबध करने की आवश्यकता है। उन्होंने छात्रों द्वारा इस तरह के शैक्षिक गतिविधियों कराने हेतु विभागाध्यक्ष एवं पूरे विभाग को बधाई दिया। आरंभ में विभाग के वरीय प्राचार्य प्रो. केके साहु ने सभी का स्वागत किया तथा इस कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि किस प्रकार विश्वविद्यालय कैम्पस स्थित वनस्पतियों का अध्ययन कर उसका डिजिटल डेटा वेस तैयार कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। अपने अध्यक्षीय भाषण में विभागाध्यक्ष प्रो. अभय कुमार ने बताया कि इस अध्ययन के दौरान कुछ नये पौधों, फ्लोरा एवं फोना की मिलने की सम्भावना है, जिसे शोध पत्र के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है। विभाग द्वारा तैयार विश्वविद्यालय मैप के सहारे छात्रों ने पूरे विश्वविद्यालय का भ्रमण किया तथा प्रजातियों का संग्रह किया। इस कार्यक्रम में शोध छात्रों ने भी भाग लिया। छात्रों के साथ विभाग के शिक्षक डॉ. गजेन्द्र प्रसाद, डॉ. रामनरेश झा, अभिषद् सदस्य डॉ. अमर कुमार मार्ग दर्शन कर रहे थे।

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