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March 2, 2021

सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली विषय पर परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित।

दरभंगा: जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत मार्च महीने के प्रथम मंगलवार को कृषि विभाग, बिहार सरकार के द्वारा सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली विषय पर परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन पटना के बामेती भवन में किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार के कई जिलों से आये अनुभवी किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली यथा टपक सिंचाई और लघु फब्बारा सिंचाई अत्यधिक कम खर्चीले एवं अधिक उपज प्रदान करने वाली सिंचाई व्यवस्था है।

बताया गया की वैज्ञानिक तरीके से सिंचाई से लगभग 60 प्रतिशत जल की बचत होती है। इससे खरपतवार में कमी आती है तथा 20 से 30 प्रतिशत तक उर्वरक की खपत में कमी होती है और 25 से 35 प्रतिशत अधिक बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पादन होता है। लघु फब्बारा सिंचाई पद्धति से 60 प्रतिशत जल की बचत होती है। बीज में बेहतर अंकुरण होता है, उर्वरक की खपत कम होती है तथा उत्पादन अधिक प्राप्त होता है। साथ ही शीत का संचरण एवं ताप पर नियंत्रण होता है।

किसानों ने इस तरह के कृषि कार्यक्रमों को चलाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के सचिव एन श्रवण कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर कृषकों को कम खर्च पर बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है। जलवायु के अनुकूल यदि खेती की जाए तो इसके बेहतर परिणाम मिलते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण फसल का उत्पादन 40 प्रतिशत तक घट सकता है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बिहार के 8 जिले में जलवायु अनुकूल खेती की जा रही है। उल्लेखनीय है कि विगत 10 वर्षों में लगातार औसत वषार्पात घटता बढ़ता रहा है तथा 5 वर्ष सामान्य से कम वषार्पात रहा। जल-जीवन-हरियाली अभियान खेती के लिए वरदान साबित हो रहा है।

दरभंगा में कृषि विज्ञान केंद्र जाले तथा कृषि विश्वविद्यालय की देख-रेख में 591 एकड़ में जलवायु अनुकूल खेती के अंतर्गत गेहूं, मक्का, राई, आलू, एवं मसूर की खेती की जा रही है। जाले प्रखंड के जाले, राढी, बरहमपुर, रतनपुर तथा सिंहवाड़ा प्रखंड के सनहपुर पंचायत में यह खेती की जा रही है। कार्यक्रम में जीरो टिलेज खेती के फायदे बताए गए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार के विकास आयुक्त आमिर सुबहानी ने सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली तथा जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने को कहा।

कार्यक्रम में एन श्रवण कुमार सचिव, कृषि विभाग पटना, अरविंद कुमार चौधरी, प्रधान सचिव, ग्रामीण विभाग पटना, रवि मनु भाई परमार, प्रधान सचिव, लघु सिंचाई पटना, राजीव रौशन, निदेशक, जल-जीवन- हरियाली, आदेश तीतरमारे, निदेशक, कृषि विभाग, नंदकिशोर, निदेशक, उद्यान विभाग, जितेंद्र प्रसाद, निदेशक बामेति, धर्मेंद्र सिंह, सचिव, मत्स्य विभाग, प्रभारी जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया, जिला कृषि पदाधिकारी राधा रमण, परियोजना निदेशक आत्मा पूर्णेन्दु नाथ झा, उप निदेशक जन संपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता, वरीय उप समाहर्ता ललित राही, वरीय उप समाहर्ता राहुल कुमार, सहायक निदेशक उद्यान आभा कुमारी, सहायक निदेशक रसायन कुणाल कुमार, सहायक निदेशक इंजीनियरिंग शम्भु कुमार सिंह, सहायक निदेशक पौधा संरक्षण सीमा कुमारी, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सोहन यादव सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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