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June 14, 2021

राष्ट्रीय एससी एसटी आयोग के संज्ञान पर एक साल बाद दर्ज हुई प्राथमिकी।

दरभंगा: दरभंगा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (डीएमसीएच) में एक्सपायर्ड खून चढ़ाने से एक साल पहले हुई महिला की मौत में तीन डॉक्टरों सहित छह पर अब प्राथमिकी दर्ज हुई है। वह भी तब जब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) आयोग ने संज्ञान लिया है। उसने डीएम व एसएसपी से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
डीएमसीएच के इमरजेंसी विभाग में 17, मई 2020 को सीतामढ़ी जिले के परसौनी निवासी मिट्ठू पासवान की गर्भवती पत्नी गंगा देवी को भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के लिए ब्लड बैंक से एक्सपायर्ड ब्लड दे दिया गया था। जुड़वा बच्चों को जन्म देने के बाद ब्लड चढ़ाने से गंगा देवी की मौत हो गई थी।
थाने और अन्य जगह शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर गंगा के भाई पवन कुमार पासवान सहित वाम दलों ने सड़क जाम व धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम व डीएमसीएच के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. राज रंजन प्रसाद ने अलग-अलग जांच कमेटी गठित की थी।
डीएम की ओर से गठित टीम ने जांच में पाया था कि ब्लड के रिएक्शन की जानकारी होने के बावजूद संबंधित कर्मियों ने मरीज की जान बचाने के लिए अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन नहीं किया। लापरवाही बरतने पर चिकित्सक डॉ. स्नेही प्रिया, डॉ. प्रतिभा झा, वार्ड अटेंडेंट संजय मंडल, ब्लड बैंक के चिकित्सक डॉ. हर्षवर्धन, कर्मी राजकिशोर और टेक्नीशियन रामचंद्र रजक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
इंसाफ नहीं मिलने पर पीडि़त पक्ष ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, एससी-एसटी आयोग सहित कई से पत्राचार किया। एससी-एसटी आयोग के संज्ञान लेने के बाद दोषी पाए गए डॉक्टरों व कर्मियों पर एससी-एसटी थाने में केस दर्ज किया गया है। थानाध्यक्ष रवि चौधरी का कहना है कि जांच में मदद के लिए डीएमसीएच अधीक्षक को पत्राचार किया गया है।

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