Home Featured पृथक मिथिला राज्य केलिए 19 जुलाई को संसद भवन पर होगा प्रदर्शन: डॉ0 बैजू।
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पृथक मिथिला राज्य केलिए 19 जुलाई को संसद भवन पर होगा प्रदर्शन: डॉ0 बैजू।

दरभंगा: मिथिला के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, शैक्षणिक, साहित्यिक और भाषा के क्षेत्र में समग्र विकास के लिए पृथक मिथिला राज्य का गठन निहायत जरूरी है। क्योंकि सांस्कृतिक संपन्नता के लिए दुनिया भर में विख्यात मिथिला आज सरकारी अपेक्षाओं के कारण लगातार आर्थिक पिछड़ेपन का शिकार होने को मजबूर हो रहा है । नतीजा है कि जिस क्षेत्र के गांव-गांव में कभी शिक्षा का केंद्र हुआ करता था, आज वहां के छात्र पलायन को मजबूर हो रहे हैं। बाढ़ की जिस विभीषिका को हमारे पुरखों ने देखा। आज हमलोग भी इससे तबाह हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ी भी इससे अछूती नहीं रहेगी। यह निर्विवाद सत्य जान पड़ता है। क्योंकि बाढ़ के निदान का भरोसा देकर सिर्फ और सिर्फ मिथिला को ठगा जाता रहा है।

उक्त बातें विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति जारी कर कही। जारी विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि पृथक मिथिला राज्य के गठन सहित अन्य मांगों के समर्थन में 19 जुलाई को अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के तत्वावधान में संसदीय सत्र के दौरान संसद भवन पर ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ प्रदर्शन किया जायेगा। इसमें भाग लेने के लिए मिथिला के लोगों का जत्था डाॅ महेन्द्र नारायण राम, डाॅ बुचरू पासवान, प्रो जीवकांत मिश्र, डाॅ अशोक सिंह आदि के नेतृत्व में 18 जुलाई की सुबह बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेगा। जबकि दिल्ली में आन्दोलन की कमान समिति के संयोजक प्रो अमरेन्द्र कुमार चौधरी एवं ई शिशिर कुमार झा आदि संभालेंगे।

डाॅ बैजू ने कहा कि जब इस क्षेत्र पर बाढ़ का कहर नहीं होता तो उस समय इस क्षेत्र पर सूखे का प्रहार होता है। बावजूद इसके मिथिला सूखा और बाढ़ कि कोढ का निरंतर शिकार होता आ रहा है और इसके आस पास आंसू पोछने वाला कोई नहीं है। जहां एक और खेती चौपट हो गई है, वहीं मिथिला के मजदूर पलायन करने को विवश हो रहे हैं। रोजगार के अभाव का दंश झेलने के लिए भी यह क्षेत्र कम मजबूर नहीं हो रहा। चीनी मिल, पेपर मिल, जूट मिल आदि यहां कबार का ढेर मात्र बने हुए हैं। मिथिला की प्रतिभा रोटी के लिए विभिन्न प्रदेशों में मजदूरी करने को विवश है।

उन्होंने कहा कि भाषा-साहित्य का विकास संरक्षण के अभाव में प्रभावित हो रहा है। मैथिली के प्रति सरकारी स्तर पर षड्यंत्र चल रहा है। मिथिला के विकास के नाम पर ऐसी ओछी राजनीति की जा रही है। जैसे सरकार की नजर में मिथिला क्षेत्र उसका अंग ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन के दौरान मिथिला क्षेत्र अंतर्गत ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर के लगभग 500 किलोमीटर क्षेत्र में एग्रीकल्चर काॅरिडोर बेस्ड विकास के तहत नेशनल एग्रीकाॅरिडोर की स्थापना करते हुए विभिन्न एग्रीकल्सटर के प्रोत्साहन के लिए एग्रोबेस्ड आईटी एवं बायोटेक्निकल एजुकेशनल हब बनाने सहित मिथिला मखान के उत्पादन एवं निर्यात के लिए भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अधीनस्थ नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड एवं वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी में सूचीबद्ध करते हुए इसे प्राथमिकता देने के लिए सरकार से अनुरोध किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित बिहार की एकमात्र भाषा मैथिली की प्रगति में सोची-समझी राजनीति के तहत बाधा उत्पन्न किया जा रहा है। इसे राज-काज की भाषा बनाये जाने में कोताही बरती जा रही है और मैथिली के शिक्षकों की बहाली में बार-बार अवहेलना की जा रही है।

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति इन सभी समस्याओं के एकमात्र निदान के लिए पृथक मिथिला राज्य के पुनर्गठन को अवश्यंभावी मानती है। समिति इसके लिए संघर्षशील है और मिथिला की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, साहित्यिक और भाषाई क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मिथिला के सड़कों से लेकर संसद तक आंदोलन चलाती आ रही है और पृथक मिथिला राज्य के गठन तक यह अभियान अनवरत चलता रहेगा ।

इसी क्रम में आगामी 19 जुलाई को संसदीय सत्र के दौरान संसद भवन पर ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ प्रदर्शन का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। जिसमें मिथिला के विभिन्न हिस्से के लोगों सहित प्रवासी मैथिल भी भाग लेंगे ।

उन्होंने कहा कि दरभंगा में उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित करने के लिए राज्य सरकार से निरंतर आग्रह किया जाता रहा है। लेकिन इस मांग को भी वर्षों से उपेक्षित किया जा रहा है। समिति केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह करती है कि वह मिथिला वासी के धैर्य की परीक्षा लेना छोड़ कर अविलंब चिर प्रतीक्षित मांगों यथा, मिथिला के समग्र विकास के लिए अविलंब पृथक मिथिला राज्य का गठन, केंद्र और राज्य सरकार सभी कार्यालय में मैथिली अनुवादकों की बहाली, बाढ़ और सूखे का स्थाई निदान, बंद पड़े चीनी मिल, जूट मिल, कागज मिल आदि को चालू करने के साथ-साथ नए उद्योगों की स्थापना कर रोजगार सृजन, मिथिला को शिक्षा का हब बनाकर छात्रों के पलायन पर अविलंब रोक, आकाशवाणी दरभंगा से समस्त प्रसारण मैथिली भाषा में करने, मिथिला एवं मैथिली के उत्थान सहित इसके सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए डीडी मैथिली की स्थापना करने तथा आकाशवाणी, दरभंगा में समाचार एकांश स्थापित कर प्रादेशिक समाचार के साथ-साथ मैथिली में भी समाचार का प्रसारण आदि शामिल है। उन्होंने कहा कि उपर्युक्त मांगों की पूर्ति नहीं होने की स्थिति में समिति आंदोलन को और धारदार बनाएगी ।

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