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2 weeks ago

सखी बहिनपा ग्रुप की नई पहल, मधुश्रावणी पैकेज सेवा अब पूरे भारत में।

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दरभंगा: मैथिल संस्कृति के संरक्षण हेतु ‘सखी-बहिनपा’ ग्रुप ने पूरे भारत के किसी भी क्षेत्र में मधुश्रावणी पैकेज सेवा शुरू किया है। आज के इस भागदौड़ भरी जिंदगी में जब पलायन मिथिला की एक बहुत बड़ी समस्या बन कर रह गई है। ऐसे में इसका प्रभाव यहां के अधिकांश पर्व पर भी पड़ा है। मिथिला में नवविवाहिता के लिए एक ऐसा ही पर्व है मधुश्रावणी। हर वर्ष मिथिला से हजारों की संख्या में नवविवाहिता देश के अन्य हिस्से में जाकर बस रही हैं। ऐसे में उन्हें मधुश्रावणी करने में काफी कठिनाई होती है, क्योंकि मधुश्रावणी के लिए आवश्यक सामानों की उपलब्धता उन्हें नही हो पाती है। ‘सखी-बहिनपा’ ग्रुप के द्वारा शुरू किया गया यह सेवा ऐसी नवविवाहिताओं के लिए काफी मददगार साबित हो रही है।

‘सखी-बहिनपा’ ग्रुप की संस्थापिका आरती झा ने बताया कि यह ग्रुप लंबे समय से मैथिल महिलाओं के लिए समर्पित है जो कि मिथिला की परंपरा व संस्कृति के संरक्षण हेतु सक्रिय है। इसी कड़ी में उनके ग्रुप के द्वारा ग्रुप की महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध करवाते हुए मधुश्रावणी पैकेज सेवा शुरू किया गया। वहीं सखी बहिनपा ग्रुप की संचालिका छाया कहती हैं कि मिथिला का विकास बिना मैथिल महिलाओं के उत्थान के नहीं हो सकता है। उनकी संस्था मैथिल महिलाओं को उनके ही हुनर के जरिये उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है। वहीं सखी-बहिनपा ग्रुप की हेमा झा ने बताया कि ग्रुप के द्वारा शुरू किया गया मधुश्रावणी पैकेज लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। इस पैकेज से महानगरों में रहने वाली कई मैथिल नवविवाहिताएं लाभान्वित हो रही हैं। साथ ही इस पहल से कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। यह पूछे जाने पर की उन्हें मदुश्रावणी पैकेज का विचार कैसे आया, तो वह बताती हैं कि ‘सखी-बहिनपा’ ग्रुप से जुड़े बहुत सी ऐसी महिलाएं थी जिनके परिवार के कमाने वाले सदस्य की नौकरी कोरोना काल मे लॉकडाउन लग जाने के कारण चली गई। ऐसे में उन्होंने सोचा कि क्यों न महिलाएं अपने हुनर को आय का जरिया बनाए। इसी के साथ उन्होंने वैसी महिलाओं को अपने साथ जोड़ा जो मदुश्रावणी पर्व से जुड़े सामानों को बनाना जानती हैं और फिर उसे एक पैकेज के रूप में नवविवाहिताओं के लिए तैयार किया।

मिथिला से काफी दूर दमण-दीव में रहने वाली साधना सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि उन्हें सोसल मीडिया के माध्यम से ‘सखी-बहिनपा’ ग्रुप के इस पहल के बारे में पता चला। जिसके बाद उन्होंने इसका लाभ उठाया। साधना बताती हैं कि मिथिला की संस्कृति के संरक्षण हेतु सखि बहीनपा के इस कदम का लोगों के तरफ से अधिक से अधिक प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

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