Home Featured नशे में धुत्त ड्राइवर ने दुकान में घुसायी कार, सूचना पर पहुँची पुलिस ने नहीं की कोई कारवाई!
1 week ago

नशे में धुत्त ड्राइवर ने दुकान में घुसायी कार, सूचना पर पहुँची पुलिस ने नहीं की कोई कारवाई!

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दरभंगा: घटना एवं दुर्घटनाओं के मामले में पुलिस स्वतः कितनी संवेदनशील है, इसका एक और नमूना गुरुवार को लहेरियासराय में दिखा। यदि कोई दुर्घटना हुई और वहां क्षति के साक्ष्य मौजूद हैं और कोई शिकायतकर्ता नहीं हो तो कम से एक एफआईआर पुलिस स्वतः संज्ञान से दर्ज कर सकती है। तथ्य जांच में सामने आते हैं। पर इन दिनों सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में भी दरभंगा पुलिस का अलग रवैया दिख रहा है। यदि शिकायत का आवेदन नहीं मिला तो पुलिस कोई कारवाई नही करेगी।

दरअसल, गुरुवार को शहर के लहेरियासराय थानाक्षेत्र अंतर्गत भीआईपी रोड अवस्थित एक डिजिटल स्टूडियो में एक अनियंत्रित कार घुस गयी। इससे दुकान की दीवाल, काउंटर, कंप्यूटर आदि क्षतिग्रस्त हो गया। यह महज संयोग था कि मौके पर कोई हताहत नहीं हुआ।

घटना के बाद लोगो की भीड़ जमा हो गयी। साथ ही लहेरियासराय थाना की पुलिस भी मौके पर पहुंची। इसी बीच कुछ लोगों ने ड्राइवर को वहां से हटा दिया और कार जिसका रजिस्ट्रेशन नम्बर BR06CW 3137 था, उसे तुरंत ढक दिया। कार का अगला हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया था। मध्यस्थता करने वाले लोगों ने दुकानदार को मुआवजा दिलवाने का आश्वासन दिलाकर पुलिस कम्प्लेन न करने केलिए मना लिया।

इधर मौके पर पहुंची पुलिस के सामने लोगों ने ड्राइवर के नशे में होने की बात भी कही। घटना के साक्ष्य और गवाह भी सामने थे। पर पुलिस ने न गाड़ी देखी और न ड्राइवर की खोज खबर ली। मैनेजमेंट का खेल ऐसा कि पुलिस को मध्यस्थता करने वाले लोगों ने कार को स्कोर्पियो बता दिया और पुलिस भी मीडिया के सामने स्कोर्पियो से दुर्घटना की बात कहने लगी। ड्राइवर या गाड़ी की कोई खोज खबर नहीं ली, जबकि ड्राइवर के नशे में होने की बात वहां पुलिस के सामने की जा रही थी। मौके पर मौजूद पुलिस पदाधिकारी ने साफ कह दिया कि यदि आवेदन मिलेगा तभी कारवाई होगी। वरना कोई कारवाई नहीं होगी।

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ऐसे एक बड़ा सवाल यह उठता है कि दुर्घटना के बाद दोनों पक्ष सहमति कर लें तो पुलिस को किसी प्रकार के जांच की जरूरत नहीं होती! वाहन चालक नशे में था या क्यों हड़बड़ी में था, कार चोरी की थी या पूरे पेपर थे, कार में कोई आपत्तिजनक सामान तो नही था, क्या इनसब की जांच नहीं होनी चाहिए थी! यह तो महज संयोग था कि कोई हताहत नहीं हुआ, पर यदि शराब के नशे में या किसी संदिग्ध कारण से कार चालक जल्दी में था तो इससे बड़ा हादसा भी हो सकता था। भले ही इन सब आरोपों की अधिकारी पुष्टि नहीं हुई, और शिकायत न होने पर एक्सीडेंट लेकर कारवाई भले न हो, पर लोगों में चर्चा का विषय था कि पुलिस को गाड़ी एवं ड्राइवर की जांच जरूर करनी चाहिए थी।

अब देखने वाली बात होगी कि इस लापरवाही केलिए जिम्मेवार पुलिसकर्मी पर कारवाई कर पूरे मामले की पुनः जांच होती है, या मैनेजमेंट के खेल में सारे सवाल अनुत्तरित ही रह जाते हैं।

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