
Home मुख्य अल-मंसूर ट्रस्ट के तत्वधान में ‘‘हथेली पे चश्म तर’’, ‘‘सोज़े तबस्सुम’’ और ‘‘हासिले मताला’’ का विमोचन।
अल-मंसूर ट्रस्ट के तत्वधान में ‘‘हथेली पे चश्म तर’’, ‘‘सोज़े तबस्सुम’’ और ‘‘हासिले मताला’’ का विमोचन।

दरभंगा: आज रविवार को तीन बजे पूर्वाहण में अल-मंसूर ट्रस्ट के तत्वधान में ‘प्रसिद्ध कवि शमीम फारुकी की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर अल-मंसूर एडूकेशनल एण्ड वेल्फेयर ट्रस्ट के तत्वधान में दमरी मंजिल डा0 आफताब हुसैन कम्पलेक्स सुभाष चैक, लालबाग, दरभंगा में ‘‘एक शाम शमीम फारुकी के नाम’’ का आयोजन किया गया। जिसमें शमीम फारुकी के दूसरे शेरी मजमूआ ‘‘हथेली पे चश्मे तर’’बाक़्याते शमीम फारुकी का विमोचन विश्व प्रसिद्ध कवि प्रो0 अब्दुल मन्नान तर्जी , प्रो0 शाकीर खलीक, रहबर चन्दन पटवी, किरण फारुकी, हैदर वारसी और जमाल ओवैसी, डा0 मंसूर खुश्तर के हाथों किया गया। इस अवसर पर ट्रस्ट के सेक्रेटरी डा0 मंसूर खुश्तर कहा कि ‘‘शमीम फारुकी उर्दू अदब के प्रसिद्ध कवि थे। शमीम फारुकी के देहान्त के बाद ऐसा लगने लगा था के दूसरे बहुत सारे फनकारों की तरह दुनियां इन्हें भी धीर धीरे भुलाती जा रही है। उनकी धर्मपत्नी किरण फारुकी और उनके सुपुत्र सज्जाद अहमद ने शमीम फारुकी के छुपे हुए कलाम को जमा करके एक पुस्तक का रुप दिया। इस अवसर पर प्रोग्राम की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि रहबर चन्दन पटवी ने किया और मेहमाने खसूसी प्रो0 अब्दुल मन्नान तर्जी और प्रो0 शाकीर खलीक़ थे। इस अवसर पर मौजूद सहित्यिक लोगों में मुजीर अहमद आजाद, डा0 एहसान आलम, डा0 सैयद जफर आफताब हुसैन, नजमुस साक़िब आरजू, डा0 इंतेखाब हाश्मी, फिरदौस अली, इरफान पैदल, मंजर रेंढ़वी, मनव्वर राही, मंज़र सिद्दीकी, एम0 ए0 करीमी, सज्जाद अहमद , रफी निशतर, हबीब असग़र, वसीम अखतर, इनामुल हक बेदार, ऐहतेशामुल हक, मतीन कासमी आदि उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन डा0 मंसूर खुश्तर और संचालन मुजीर अहमद आजाद ने किया।

