Home मुख्य शराब प्रकरण में विधायक के भाई को नही जाना पड़ा जेल, न्यायलय ने दे दिया त्वरित बेल।
मुख्य - August 26, 2016

शराब प्रकरण में विधायक के भाई को नही जाना पड़ा जेल, न्यायलय ने दे दिया त्वरित बेल।

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दरभंगा। अभिषेक कुमार

शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी अजय सरावगी को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने जमानत दे दी. उत्पाद विभाग यह साबित करने में विफल रही कि उन्होंने शराब पी थी. सनद रहे कि बीती रात हसनचक से व्यवसायी अजय सरावगी सरकारी कर्मी पंकज कुमार भगत और रितेष कुमार को उत्पाद विभाग ने ए.सी. कार में बैठकर शराब पीने के आरोप में गिरफ्तार किया था. उत्पाद विभाग ने उनके कार से तीन शीशे के ग्लास और पानी का बोतल की बरामदगी दिखाई थी. क्योंकि अजय सरावगी भाजपा विधायक संजय सरावगी के छोटे भाई हैं. जिसके कारण यह खबर सुर्खियों में आ गई और हर लोगों के जुवान पर यही चर्चा थी. उत्पाद विभाग ने नगर थाना में तीनों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करा दी, जिसमें उत्पाद अधिनियम 27ए और 53ए उत्पाद अधिनियम लगाया गया. आज मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के यहां तीनों की पेशी हुई, तो बचाव पक्ष ने जमानत की अर्जी दे दी. जिसके बाद सुनवाई हुई. बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि हमारी गाड़ी से शराब की बरामदगी नहीं हुई है. मैं गुटखा खाये हुए था, जो ब्रेथएनलाईजर में दिखाया जाता है. माननीय न्यायालय ने बचाव पक्ष की दलील से सहमति होते हुए 10-10 हजार के बंध पत्र पर उनलोगों को मुक्त कर दिया. जिसके बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब उत्पाद अधीक्षक के नेतृत्व में वैगनार कार सहित तीनों को गिरफ्तार किया गया. इस संबंध में उत्पाद अधीक्षक का दावा था कि ब्रेथएनलाईजर में पोजेटिव था. लेकिन शराब की बरामदगी नहीं हुई थी. ऐसे में मेडिकल जांच क्यों नहीं कराई गई? अगर मेडिकल जांच हो गई रहती और उसमें अल्कोहल आ जाता तो आज स्थिति दूसरी होती. अगर मेडिकल जांच में अल्कोहल नहीं पाया जाता, तो एक प्रतिष्ठित व्यवसायी का टॉर्चर नहीं होता. हैरत की बात है कि राज्य सरकार शराबबंदी को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर उपलब्धि के रूप में देख रही है. ऐसे में उत्पाद विभाग द्वारा मेडिकल जांच नहीं कराना और सीधे गिरफ्तार कर व्यवसायी को जेल भेजने का प्रयास करना अपने आप में सवाल खड़े कर रहे हैं. भाजपा ने पहले ही कानून का दुरूपयोग होने की बात कहकर सरकार को कटघड़े में खड़ा कर दिया है. कई लोगों को इस कानून के तहत जेल जाना भी पड़ा है. सवाल उठता है कि व्यवसायी के साथ सरकारी कर्मी भी था. अगर आज उन्हें जेल भेज दिया जाता, तो उनकी नौकरी भी जा सकती थी. ऐसे में उत्पाद विभाग की कारवाई संदेह के घेरे में है. इससे इंकार नहीं किया जा सकता है. दूसरी ओर हसनचक जैसे सार्वजनिक जगहों पर बंद गाड़ी में शराब का सेवन जैसा कि उत्पाद विभाग का आरोप है और शराब का बोतल नहीं बरामद होना दर्शा रहा है कि अगल-बगल से शराब की कथित रूप से आपूर्ति की गई थी. अगर इसमें सच्चाई है तो निश्चित रूप से नगर थाना पुलिस पर भी नये उत्पाद कानून को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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