
हाकिम की तो बात न पूछो, यहां मुलाजिम भी मन हुआ तो आते हैं वरना घर पर ही रह जाते हैं।

सौजन्य- राजीव झा (पत्रकार)
दरभंगा: दरभंगा के कर्मठ जिकाधिकारी डा0 चंद्रशेखर सिंह जहाँ कार्यालयों में पदाधिकारी एवं स्टाफ के ससमय उपस्थित होने एवं कार्यों में तेजी लाने के हर प्रयास को प्राथमिकता देते दिखते हैं, वहीँ बहेड़ी प्रखंड स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय में शायद इनके प्राथमिकता का कोई महत्व नही दिखता। कार्यालय के लेट लतीफ़ खुलने एवं कर्मियों के गायब रहने की सूचनाएं मिलने के बाद जब वहाँ मीडिया की टीम शनिवार को 11 बज कर 20 मिनट पर पहुँची तो मुख्य द्वार केवल खुला था। बाकी सभी कक्षों में ताले लटके थे और पदाधिकारी से लेकर कर्मी तक सभी गायब थे। तब मीडियाकर्मी ने सीडीपीओ मिनाक्षी प्रभा को करीब चार बार उनके मोबाइल पर कॉल किया, पर न फोन उठा और न ही कॉल बैक आया। तब सम्बन्धित डीपीओ को फोन कर जानकारी ली गयी तो बताया गया छुट्टी नही है। अगर कार्यालय बन्द है तो इसकी वे जांच करवाएंगे। डीपीओ से बात होने के कुछ देर बाद सीडीपीओ साहिबा का फोन मीडियाकर्मी को आया। और मैडम ने जो कहा, शायद ऐसे ही घटना को “एक तो चोरी उपर से सीनाजोरी” का नाम दिया जा सकता है। सफ़ेद झूठ बोलते हुए कहती है कि 9 बजकर 55 मिनट से कार्यालय खुला है। वे प्रखंड से बाहर हैं और सभी कर्मी कार्यालय में मौजूद हैं। बाहर निकल गए मीडियाकर्मी संतुष्टि केलिए फिर एक बार पूरा कार्यालय घूम लिए। पर कोई नही मिला। उसी समय हावीडीह दक्षिणी के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 51 के अनियमिता की शिकायत लेकर कुछ ग्रामीण पहुंचे। उन ग्रामीणों के अलावा आसपास के लोगों ने भी बताया कि सीडीपीओ, बड़ा बाबु, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित करीब 15 लोग यहां कार्यरत हैं। पर हमेशा का यही हाल है। अंततः डेढ़ बजे दो कर्मी वहां पहुंचे।
अब देखना है कि जनता की गाढ़ी कमाई से मोटे वेतन उठाने वाले ऐसे लेट लतीफों पर डीएम साहब निष्पक्ष जांच करवाकर जिम्मेवार पदाधिकारी पर कोई करवाई भी करते हैं या लीपापोती ही होती है मामले की। गौरतलब है कि यदि जनता के गाढ़ी कमाई से मोटे वेतन उठाने वाले पदाधिकारी संवेदनशील रहते तो कर्मी इस मनमानी की जुर्रत शायद न जार पाते।

