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मुख्य - July 20, 2016

बच्चों का स्कूल या सुअरो की पाठशाला !

Voice of Darbhanga's photo.

बच्चों का स्कूल या सुअरो की पाठशाला !
लालू राज के समय बिहार में भले ही चरवाहा विद्यालय खुला जिसका घीरे – घीरे आज अस्तितव भी समाप्त होगया वहां भी स्कुल में जानवरों को ले जाने की इज़ाज़त नहीं थी बल्कि जानवरों को खुले में चरने को छोड़ उसे चरानेवाले को स्कुल में पढ़ाई करने की वयवस्था की गयी थी पर यहाँ ठीक उसके उलट नितीश राज में बच्चों के स्कुल में ना सिर्फ जानवरों का आना जाना लगा रहता है बल्कि स्कूली बच्चे के साथ ये जानवर भी मिड डे मिल

का आनंद लेते है ,इतना ही नहीं शौचालय पर गांधी जी के चश्मे के साथ लिखे स्लोगन एक कदम स्वच्छता की ओर को भी ये जानवर खूब मुंह चिढ़ाते नज़र आते है , स्कुल की छुट्टी के बाद भले ही सारे बच्चे घर चले जाए पर इन जानवरों के लिए मानो यह आवासीय विद्यालय बनकर रह गया हो जहां ये दिन – रात पुरे परिवार के साथ आराम से स्कूल में ही गुजारते है ।
स्कूलों की दुर्दसा किसी से छिपी नहीं पर बिहार के दरभंगा शहर में बने इस स्कुल की दुर्दसा देख आप भी चौक जायेंगे, चन्द मिनटो में तस्वीरें देख आप भी समझ जायेंगे ये सरकारी विद्यालय बच्चों का स्कूल है या सुअरो की पाठशाला। दरभंगा मुख्यालय जहां जिले के तमाम बड़े अधिकारी का दफ्तर है वहां से महज़ कुछ सौ मीटरों पर अवस्थित स्कुल जहां एक ही प्रांगण में तीन अलग अलग विद्यालय चलते है पहला वंशी दास कन्या मध्य विधायल दूसरा राजकीय प्राथमिक विधयलय तीसरा मध्य विद्यालय नगर फिरभी वयवस्था ऐसी की आँखे खुली की खुली रह जाए यहाँ पढ़नेवाले बच्चे गन्दगी के बीच सूअर जैसे जानवरों के साथ रहने को मज़बूर है, चारो तरफ जल जमाव और जबरदस्त गन्दगी में दिन भर सूअर स्कुल में खुलेआम उधम चौकड़ी मचाते नज़र आते है खेल के मैदान से लेकर स्कुल के बरामदे तक इन सुअरो का अबैध कब्ज़ा है यहाँ तक की पानी पिने के हैण्डपम्प से लेकर स्कुल में बने शौचालय पर भी सुअरो ने डेरा डाल रखा है , बदबू ऐसी की क्लास रूम में भी सासे लेना दूभर हो जाए , बात इतने पर ही नहीं ख़त्म होती बल्कि बच्चों के मिड डे मिल स्कुल में मिलनेवाला भोजन के समय ये सूअर बच्चों के खाने के एकदम नज़दीक आ जाते है ढीठ इतने की लाख भगाने से भी नहीं भागते फरस्वरूप इन सुअरो के बीच ही बच्चों को बैठ कर अपना मध्यान भोजन करना परता है टीचर की माने तो कभी कभी तो सूअर मौका मिलते ही बच्चों के थाली में में अपना मुंह लगाकर उनके खाने भी चट कर जाते है दिन भर इन गन्दगी और सुअरो के बीच रहनेवाले बच्चे को कई बीमारिया होने का खतडा बना रहता है कई अभिवहक तो सिर्फ यहाँ कि गन्दगी और सुअरो के कारन अपने बच्चों का स्कुल से नाम ही कटवा दिया , तो कुछ स्कुल की गन्दगी को देख अपने बच्चे का दाखिला ही नहीं करवाया और ये हम नहीं बल्कि स्कुल के खुद टीचर ही कह रहे है तभी 500 से ज्यादा छात्रों की संख्या वाले स्कुल में 50 से 75 ही स्कुल में नज़र आये ।
सवाल यह है की जब जिला मुख्यालय के बीच स्कुल का यह हाल है तो सुदूर ग्रामीण इलाके का अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है

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