भाजपा जिलाध्यक्ष चुनाव: कहीं प्यादे से पिट न जाए वजीर!

दरभंगा।अभिषेक कुमार
दरभंगा भाजपा के संगठन चुनाव में प्यादे और वजीर का खेल जोरो पर होने की खबर है क्योंकि एक मननीय को अपने प्रदेश के मननीय के कमजोर होने से खुद के अस्तित्व पर भी डर कहीं न कहीं समा गया है। अपने स्वजातीय प्रदेश नेतृत्व के कारण दरभंगा में मुठ्ठी भर स्वजातीय होने के वाबजूद लगातार पार्टी में एकलौते तानाशाह बन गए। परंतु इसबार संगठन चुनाव में मिथिला का स्वाभिमान जागने को आधार बना कर माननीय के प्यादे रहे बालेंदु झा द्वारा माननीय के तानाशाही के विरुद्ध आजादी का बिगुल फूंक दिया जिसकी धमक ने प्रदेश तक को झकझोरने पर मजबूर कर दिया। इसी से सीख लेकर माननीय 25 जुलाई को जिलाध्यक्ष केलिए होने वाले नामांकन को पूरा ध्यान केंद्रित कर चुके हैं। नामांकन केलिए जगह समय सब मनमुताबिक करने का योजना बनाने से लेकर प्रत्याशियों तक के पहुँचने और न पहुँचने तक की सेटिंग करवाने में लग चुके होने की खबर भी आ रही है। अबतक अपने जिस प्यादे पर बाजी खेल रहे थे, उसे पीटते देख कर ऐन मौके पर प्यादा बदलने का खेल खेल चुकने की खबर सूत्रों से मिल रही है। वैसे कांग्रेस में बढ़ते ब्राह्मणों के आधार को देखते हुए और जातीय समीकरण के आधार पर पूर्व विधायक गोपालजी ठाकुर के नाम की चर्चा सबसे आगे है। यदि वैश्य आधार पर लिया गया तो जिलामंत्री अशोक नायक के जिलाध्यक्ष बनने की सम्भावना प्रबल बताई जा रही है पार्टी सूत्रों द्वारा। परंतु पिछले 15 सालों में कभी भी बहुमत या प्रबल दावेदार को नही चुनकर हमेशा माननीय के चहेतों को संगठन में जगह मिली है। पर इसबार परिस्थिति पलट चुकी है और माननीय के प्रदेश में बैठे स्वजातीय आका की हालत भी बहूत मजबूत नही है। ऐसे हालातों में भाजपा जिलाध्यक्ष के चुनाव का रोमांच निश्चित रूप से टी20 मैच के रोमांच से कम नही होगा क्योंकि पता नही कि कौन सा छिपा हुआ प्यादा किस वजीर को मात दे दे, यह अंदाजा लगाना मुश्किल है।

