
फर्जी फायनेंस कम्पनियों के सफल होने के पीछे बैंको के रोजगार लोन देने में जटिलता भी जिम्मेवार! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
शुक्रवार को एकबार फिर सैकड़ो लोगों को लोन देने के पर लाखों की ठगी करके फर्जी फायनेंस कम्पनी मणिरत्नम रियल प्राइवेट लिमिटेड के फरार हो जाने से एक बड़ा सवाल ऐसे कम्पनियों के सफल हो जाने पर उठता है। लोन देने के नाम पर जिले में कई फर्जी फायनेंस कम्पनियां आगे आती है और लोगों का लाखों-करोडो लूट कर चम्पत हो जाती है। यह सिलसिला लगातार चलता आ रहा और लोग कभी कोपरेटिव तो कभी निजी फायनेंस के नाम पर ठग लिए जाते हैं। बड़ा सवाल यह है कि इस तरह के फ्रॉड सामने आने के बाद भी लोग ठगी का शिकार कैसे हो जाते हैं और संस्था खुलने पर स्थानीय प्रशासन नींद से जगने केलिए ठगी हो जाने का इंतज़ार क्यों करता है। संस्था खुलने पर इसके असली नकली होने का सत्यापन क्यों नही किया जाता ताकि फ्रॉड संस्थाओं को पनपने का मौका ही न मिले।
इस तरह के संस्था के सफल हो जाने का एक प्रमुख कारण सरकारी बैंकों द्वारा व्यवसाय हेतु आमलोगों को छोटा लोन देने में भी नकारात्मक रवैया एवं जटिल प्रक्रिया बना देना भी जिम्मेवार है। यहां गरीबी और बेरोजगारी बहुत ज्यादा है। नौकरी नही करने वाले व्यक्ति कोई छोटी मोटी पूँजी लगाकर व्यवसाय करने का मौका ढूंढते हैं। ऐसे में व्यवसाय शुरू करने केलिए एक छोटा लोन लेने केलिए भी बेरोजगारों को भी महीनो दौड़ लगाना पड़ता है फिर भी बिना तगड़ी पैरवी और विभिन्न स्तरों पर चढ़ावा दिए बिना नही हो पाता है। जब तक लोन होता है तबतक लोन केलिए प्रयास केलिए लिए गये कर्जे का बोझ अलग बन जाता है। ऐसे हालातों में ऐसे कम्पनियां की लुभावन स्किम और स्थानीय लोगों को एजेंट के रूप में बहाली लोगों को अपने ओर आकर्षित करता है और लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं। कुल मिलाकर कहा जाय तो इस ठगी केलिए बैंकों के रोजगार लोन देने में नकारात्मक रवैया और जटिलता उतपन्न करना भी कहीं न कहीं बड़े रूप से जिम्मेवार है।

