Home मुख्य अक्टूबर तक मात्र दो फीसदी योजनाएं ही पूरी हो पायी है मनरेगा की। Voice of Darbhanga
मुख्य - November 11, 2016

अक्टूबर तक मात्र दो फीसदी योजनाएं ही पूरी हो पायी है मनरेगा की। Voice of Darbhanga

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दरभंगा। विशेष पड़ताल
गरीबों व मजदूरों को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर चली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति जो वॉइस ऑफ़ दरभंगा टीम की विशेष पड़ताल में सामने आया है, उसे देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि गरीबों के लिए सरकार व प्रशासन कितना फिक्रमंद हैं। वित्तीय वर्ष 2016-17 की समाप्ति के तकरीबन मात्र साढ़े चार माह शेष हर गए हैं। लेकिन, आंकड़े बताते हैं कि दरभंगा प्रमंडल में ली गई योजनाओं में से अक्टूबर माह तक मात्र 36 फीसद योजनाएं ही पूर्ण हो पाई हैं जबकि खर्च कुल आवंटित राशि का 84 प्रतिशत हो चुका गया है। सबसे बुरी स्थिति दरभंगा जिले की है। अक्टूबर तक मात्र 2 फीसद योजनाएं ही पूर्ण हो पाई हैं। सूत्रों की मानें तो योजनाओं के क्रियान्वय में गड़बड़ी भी की गई है। जिसका खुलासा समग्र जांच से ही संभव है।इस योजना से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि एमआइएस में जिन योजनाओं को क्रियान्वित दिखाया गया है वस्तुस्थिति धरातल पर वह योजना है ही नहीं। इससे स्पष्ट होता है कि पंचायतस्तर पर धांधली की जा रही है।
मनरेगा की जिलावार स्थिति पर नजर डालें तो दरभंगा में कुल 9824 योजनाओं में 186 पूर्ण और 9640 अपूर्ण हैं। वहीँ मधुबनी में कुल 10933 योजनाओं में 799 पूर्ण जबकि 10134 अपूर्ण है। समस्तीपुर में भी कुल 29191 योजनाओं में 16997 पूर्ण जबकि 12194 अपूर्ण है।
आंकड़ा पर नजर डालने से स्पष्ट हो जाता है कि दरभंगा प्रमंडल के दरभंगा जिले में इस योजनाओं के क्रियान्वयन की गति काफी धीमी है। पूर्व की लंबित 9366 व चालू वित्तीय वर्ष में 460 कुल 9824 योजनाएं हैं। जिसमें से अक्टूबर 2016 तक मात्र 186 योजनाएं ही पूर्ण हो पाईं। 9640 योजनाएं अपूर्ण हैं। पूर्ण योजनाओं का प्रतिशत कुल योजनाओं की तुलना में मात्र 2 फीसद है। यह स्थिति कमोवेश मधुबनी जिले की है। कुल योजनाएं 10933, पूर्ण योजनाएं 799 व अपूर्ण योजनाएं की 10134 है। पूर्ण योजनाओं का प्रतिशत मात्र 7 फीसद है। इन दोनों जिलों की तुलना में समस्तीपुर बेहतर स्थिति में है। यहां कुल योजनाएं 29191 हैं। पूर्ण योजनाओं की संख्या 16997 है। यानी कुल योजनाों का 58 प्रतिशत काम पूर्ण हो चुका है। इसे संतोषप्रद कहा जा सकता है।

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