
दूरस्थ शिक्षा के छात्रों में प्रतिभा की कमी नहीं : कुलपति। Voice of Darbhanga

दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 राज किशोर झा ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ अन्याय किसी भी स्थिति में नहीं होने दी जाएगी. उन्होंने कहा कि दूरस्थ षिक्षा निदेशालय के छात्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. कुलपति आज निदेशालय द्वारा बी0एड0 (दूरस्थ माध्यम) आयोजित परिचयात्मक मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्र-छात्राओं का है. लेकिन दूरस्थ शिक्षा निदेशालय को छोड़कर छात्रों को जो सर्वोच्चता मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पा रही है. विश्वविद्यालय छात्र-शिक्षक का है. मेरी कोई ईच्छा कुलपति बनने की नहीं थी. लेकिन मिथिला के शुभचिंतक के आशीर्वाद की वजह से कुलपति बन गया. विश्वविद्यालय का विकास निरंतर होता रहेगा. दिनोदिन इसकी बढ़ोतरी होती रहेगी. उन्होंने कहा कि ईमानदारी मेरी कमजोरी है. गलत कार्य किसी के दबाव में नहीं करूँगा. छात्र मेरी सुरक्षा है. छात्रों के लिए किसी की ईजाजत की जरूरत नहीं है. छात्र कुलपति से मिलने आते तो उन पर मुकदमा कर दिया जाता. यह सरासर गलत है. दूरस्थ शिक्षा से मेरा हमेशा लगाव रहा है. दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के छात्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. दत्त कार्य का मूल्यांकन करते समय उत्तरपुस्तिका में देखा था. जिसमें लगा कि किसी भी नियमित स्नातकोत्तर छात्र से अधिक प्रतिभा यहां के छात्रों में है. छात्रों की भावना आदत नहीं होनी चाहिए. उनकी समस्याओं का समाधान हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. इस अवसर पर संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो0 आई0एन0 मिश्रा ने कहा कि शिक्षक रीले रेस की तरह होते हैं. जो किसी से कम नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इस केन्द्र में नामांकन सौभाग्य की बात है. यह बिहार का अदभुत केन्द्र है. आरम्भ में आगत अतिथि का स्वागत निदेशालय के निदेशक प्रो0 ए0एन0 कारगुप्ता ने किया. वहीं धन्यवाद ज्ञापन विनय कुमार चौधरी ने किया. मंच संचालन अखिलेश कुमार मिश्रा ने किया. वहीं समापन सत्र को संबोधित करते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो0 अजीत कुमार सिंह ने कहा कि सृष्टि और राष्ट्र को संवारने और सुन्दर बनाने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षकों की सम्मान में कमी हो गयी है. जिस वजह से समाज की दुर्दशा हो गयी है. इसके लिए हमें भी आत्म अवलोकन की जरूरत है. शिक्षक को चिंतन, मनन, सिद्धान्तन और अध्यापन करना चाहिए. शिक्षक नौकर नहीं, गुरू है. ऐसा व्यवहार शिक्षक, समाज तथा सरकार को करना चाहिए तभी जाकर समाज का विकास होगा.

