
दूरस्थ शिक्षा में जल्द शुरू होगी मैथिलि की पढ़ाई: कुलपति। Voice of Darbhanga

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज किशोर झा ने कहा है कि दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर मैथिली की पढ़ाई शीघ्र शुरू होगी। वह मंगलवार को पीजी मैथिली विभाग में मातृभाषा दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कार्य भार ग्रहण करने के तुरतं बाद दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक को मैथिली की पढ़ाई प्रारम्भ करने की प्रक्रिया प्रारम्भ करने को कहा था। जल्द ही इस पर कारवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कार्य प्रणाली संतोषजनक नहीं है। प्रत्येक दिन कुलपति कार्यालय से डाक संपादित किया जाता है। लेकिन, पाया गया कि छह-छह दिन का डाक पर कोई कारवाई संबद्ध विभागों द्वारा नहीं किया जाता है। उनके पास काम करने के लिए कम समय है। फिर भी उसका उपयोग वे विश्वविद्यालय के विकास के लिए करना चाहते हैं। हर मिनट का सदुपयोग करना चाहता हूं। मुझे कुर्सी से कोई लोभ नहीं है। पर जब तक हूं विश्वविद्यालय का विकास मेरा प्रण है। सहयोग मिथिला के जनमानस से मिल रहा है। मिथिला की संस्कृति और संस्कार का कोई जोड़ा नहीं है। हमें इसे आगे ले जाना होगा। इस अवसर पर प्रो. भीम नाथ झा ने कहा कि मातृभाषा के प्रति आस्था रहना चाहिए। तभी मातृभाषा दिवस की सार्थकता होगी। मैथिली बोलें या नहीं बोलें, लिखें या नही लिखें, उसकी उतनी महत्ता नहीं है। जितना हमें मातृभाषा के प्रति जुनून पैदा करने की जरूरत है। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के प्राध्यापक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि मैथिली भाषा की दुर्दशा के लिए मैथिली भाषा भाषी स्वयं जिम्मेवार है। घरों में अपने बच्चों के साथ मैथिली में बोलने से हिचकिचाते हैं। जो दुखद है। डॉ. विद्या नाथ झा ने कहा कि मातृभाषा के रूप में मैथिली को स्वीकार करने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है। यूनेस्को ने मृत होने वाले भाषा में मैथिली को शामिल कर दिया है। यह बहूत ही ¨चता की विषय है। इसके लिए अभियान चलाने की जरूरत है। डॉ. फूल चन्द्र मिश्र रमण ने कहा कि शिक्षा स्तर में क्षरण हो रहा है। जो व्यक्ति मैथिली भाषा की पढ़ाई करते हैं उसे सम्मान की ²ष्टि से देखना चाहिए। ओएसडी प्रो. सुधीर कान्त राय ने कहा कि मैथिली के लिए प्रयास होना चाहिए। अतिथि का स्वागत मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. रमण झा ने किया। मंच संचालन डॉ. नीता झा ने किया।

