
बीमारी का बहाना बनाकर घोटाले के आरोपित नहीं हटाया गया, उर्दू आबादी करेगा आन्दोलन: नजरे आलम

दरभंगा- आज आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के क्षेत्रीय कार्यालय लालबाग दरभंगा में एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नजरे आलम ने की। बैठक को सम्बोधित करते हुए श्री आलम ने प्राचार्य पर मिडिया को मैनेज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि डा0 मुशताक अहमद जितना भी प्रयास कर लें उन्हें हर हाल में जेल जाना ही पड़ेगा। जनता एवं छात्रों के करोड़ों रूपयें को गबन कर आज खुद को इमानदार बताते हैं जो सरासर गलत है। श्री नजरे आलम ने कहा कि मुशताक अहमद मिल्लत काॅलेज में छात्रावास के नाम पर मोटी राशि बिना बिल्डिंग निर्माण के ही घटक गए। यह व्यक्ति निलंबन के बावजूद जहाँ इन्को हाजिरी लगाना है वहाँ एक भी बार नहीं गया जिससे साबित होता है कि यह अपना राजनितिक शक्ति का प्रयोग करते हैं और विश्वविद्यालय एवं सरकार के किसी भी मामले का खुल कर विरोध करते हैं। डा0 मुशताक अहमद पर आरोप साबित होने के बाद से वह लगातार बीमारी का बहाना बनाकर मेडिकल लगाकर जाँच में रूकावट पैदा करने एवं कुलपति महोदय पर राजनितिक दबाव बनाने हेतु पटना में बैठे हैं। जब्कि जाँच से पहले डा0 मुशताक काफी स्वस्थ थे और पूर्व में मिडिया के माध्यम से इसे सम्प्रदायिक रूप देने का भी प्रयास कर चुके हैं ताकि दो पक्षों का मामला बन जाए और इनके उपर घोटाले का चल रहा जाँच बन्द हो जाय। हमेशा सुनता हूँ कि कानून का हाथ लम्बा होता लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं देता। यह व्यक्ति डा0 मुशताक अहमद पहले भी इस तरह के आरोपों पर राजनितिक दबाव बनाकर पूर्व के कुलपति पर अपना धौंस जमाया करते थे और अपनी मर्जी के मुताबिक काम करते थे। सरकार कानून का राज स्थापित करे और डा0 मुशताक अहमद के विरूध चल रहे जाँच को स्वतंत्र रूप से कराने एवं उन्हें जाँच में सहयोग देने पर कठोर कार्रवाई करे। डा0 मुशताक अहमद के निलंबन के बावजूद बिहार उर्दू प्रामर्शदात्री समिति के उपाध्यक्ष के पद पर बने रहना किसी प्रकार उचित नही है। इससे न केवल उक्त समिति की गरिमा पर आँच आ रही है बल्कि इससे कानून और सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है। क्यांेकि इसके इस पद पर बने रहने से जाँच स्वतंत्र रूप से नहीं हो पायगा और घोटाले का मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला जायगा। श्री आलम ने कहा कि बिहार राज्य उर्दू प्रामर्शदात्री समिति एक एैसी सरकारी संस्था है जो सरकार को उर्दू के विकास के लिए सुझाव और प्रस्ताव देती है और उस आलोक में सरकार उर्दू के विकास के लिए योजनाएँ बनाती हैं। पूर्व में इस समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद को राज्य की नामी गिरामी हसतियों ने सुशोभित किया है। लेकिन इसबार ऐसा होता नहीं दिख रहा है। उपाध्यक्ष पद पर डा0 मुशताक अहमद के बने रहने से उर्दू आबादी में रोष पाया जा रहा है। श्री नजरे आलम ने बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार एवं महामहिम राज्यपाल, बिहार से आवेदन के माध्यम से डा0 मुशताक अहमद को अविलम्ब पदमुक्त करने एवं स्वतंत्र जाँच की माँग करने की बात की है। श्री आलम ने कहा कि डा0 मुशताक अहमद ल0न0मि0 विश्व विद्यालय के अंगीभूत संस्था माड़वारी काॅलेज के प्राचार्य और उससे पूर्व मिल्लत काॅलेज के प्राचार्य रहे हैं। इन दोनों संस्थाओं में उन पर वित्तीय अनियमित्ताओं एवं अपने अधिकारों का गलत उपयोग करने के आरोप लगते रहे हैं तथा आंत्रिक जाँच द्वारा उक्त आरोपों को सही समझते हुए विश्व विद्यालय ने उन्हें निलंबित कर रखा है। लेकिन आश्चर्य है कि विश्व विद्यालय से निलंबन के महीनों बाद भी वह बिहार उर्दू प्रामर्शदात्री समिति के उपाध्यक्ष के पद पर आसीन हैं जिसका धौंस भी वह विश्व विद्यालय कर्मियों, कुलपित एवं समाजिक कार्यकत्ताओं को दिखाते रहते हैं। जब्कि उन्हें तत्काल प्रभाव से उक्त पद से हटाकर किसी इमानदार व्यक्ति को उपाध्यक्ष बनाना चाहिए था। तभी सरकार के भ्रष्टाचार समाप्त करने का दावा भी सही साबित होगा। श्री आलम ने कहा कि जानकार यह भी बताते हैं कि भले ही डा0 मुशताक अहमद उर्दू के स्काॅलर बने फिरते हैं लेकिन तथ्य यह है कि उन्हें उर्दू बोलना भी नहीं आता है और वे जब किसी कार्यक्रम में बोलते हैं तो हास्य का विषय बन जाते हैं। अगर सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती है तो तो उर्दू आबादी इसके विरूध आन्दोलन करेगी। बैठक को मकसूद आलम पप्पु खान, मिर्जा नेहाल बेग, मो0 अरशुद्दीन दुलारे, विजय कुमार झा, असद रशीद नदवी, जावेद करीम जफर, हेमायुन शैख, अब्दुल कुद्दुस सागर, सरवर अली फैजी, जुबैर आलम आदि ने भी सम्बोधित किया और कहा कि सरकार डा0 मुशताक अहमद को उर्दू प्रामर्शदात्री समिति के उपाध्यक्ष पद से अविलम्ब हटाए नहीं तो उर्दू आबादी के साथ कारवाँ भी विरोध प्रदर्शन में भाग लेगा।

