
गरीब और अमीर केलिए अलग अलग व्यवस्था ने खोला शराबबन्दी कानून का पोल: सपा

दरभंगा : हाल में हुए हाई प्रोफाइल शराब प्रकरण पर सरकार के दोहरी नीति पर समाजवादी पार्टी द्वारा प्रेस काॅफ्रेंस कर बिहार सरकार पर जमकर निशाना साधा गया। शनिवार को पार्टी के राज्य कार्यकारीणी सदस्य मो0 वसीम अहमद ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सरकार ने पूरे राज्य में पूर्ण शराब बंदी 1 अप्रैल 2016 से लागू किया है। आज लगभग 5 महीना बीतने वाला हैं, परंतु प्रत्येक दिन शराब पीने और रखने में गिरफ्तार होने की वारदात सामने आ रही है। इससे यह साफ हो गया है कि सरकार के पास किसी भी कानून को पूर्ण रूपेण लागू करने का सामर्थ्य नहीं है। अच्छा हुआ जो गठबंधन कि सरकार का यह फैसला, आम जनता के सामने सरकार के नियंत्रण कि रोज पोल खोल रहा है। जहाॅ तक इस कानून/योजना को लागू करने की बात है तो सरकार के निर्देश के अनुसार राज्य कि तमाम पुलिस, आलाधिकारीगण सभी अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की अनदेखी कर पूरे राज्य में केवल शराब बंदी को प्राथमिकता देते हुए 24 घंटे शहर, गाॅव, गली, चैक-चैराहों पर डटी हुई है। इसके वावजूद लोग शराब का धंधा भी चला रहे है और पीने वाले खूब पी भी रहे है, सिर्फ तरीका बदल गया है। सरकार के नियंत्रण पर सवाल खड़ा हो गया है कि जब बिहार सरकार शराब की एक बूँद भी राज्य में देखना नहीं चाहती है तो फिर राज्य में शराब का आयात किस तरह से हो रहा है, यह सरकार की विफलता को दर्शाता है। कानून के मुताबिक जब कोई आम व्यक्ति के घर में शराब या फिर शराब कि खाली बोतल पाई जाती है तो परिवार के पूरे सदस्य को मुजरिम करार देते हुए सजा देने का प्रावधान किया गया है, फिर जब प्रखंड, जिला, शहर, राज्य में शराब उपलब्ध है, इस परिस्थिति में प्रखंड जिला एवं राज्य के कौन लोग जिम्मेवार होंगे और किसको मुजरिम करार दिया जायेगा। हाल ही में दरभंगा में हुए एक हाई प्रोफाइल शराब प्रकरण पर चर्चा करते हुए श्री अहमद ने कहा एक गरीब जब शराब कि खाली बोतल के साथ धराता है तो उसे जेल होती है, परंतु जब कोई पैसे वाला व्यक्ति खुलेआम चैक- चैराहों पर साथियों के साथ शराब पीते नजर आता है और पकड़े जाने पर भी रातो-रात छूट जाता है। एक ही राज्य में यह कैसा दोहरी कानूनी व्यवस्था है, आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय है।

