
तिरंगा लहराने के खातिर तिरंगे में लिपट कर आना भी मंजूर था शहीद नरेश को। Voice of Darbhanga

दरभंगाः दिल दिया है, जान भी देंगे, ऐ वतन तेरे लिए। कुछ ऐसा ही जज्बा लेकर भारत माँ केलिए न्योछावर तक हो जाने की चाहत रखने वाले छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले में शहीद 25 जवानों में शामिल बिहार के दरभंगा जिले के नरेश यादव के घर में मातमी सन्नाटा है. जिले के बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत अहिला गांव के वीर सपूत नरेश यादव की शहीद होने की खबर ज्यों ही टीवी के माध्यम से घर वालों को पता लगा, त्यों ही उनके परिवार सहित पूरे इलाके में मातम छा गया.
सीआरपीएफ कैंप से जब शहीद यादव की शहादत की खबर उनके घर फोन के माध्यम से दी गई तो उनकी पत्नी सहित पूरे परिवार में चित्कार फैल गया. शहीद की पत्नी रीता देवी पर तो आसमान ही टूट पड़ा. रीता देवी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया. शहीद जवान के तीन बच्चे इस बात को स्वीकार्य ही नहीं कर पा रहे हैं की उनके पिता छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में शहीद हो गए हैं.
पिछले 10 जनवरी को तो ही एक लंबी छूटी के बाद शहीद नरेश सीआरपीएफ कैंप के लिए निकले थे. शहीद की पत्नी रीता देवी रोते-रोते कहती हैं दो दिन पहले ही उनसे फोन पर बात हुई थी. घर के सभी सदस्यों का हालचाल पूछते हुए बच्चों के स्कूल में नामंकन करवाने की बात पूछते हुए उन्होनें फोन रखा था. हमें क्या आभास था कि उनसे यह मेरी आखिरी बात होगी.

दूसरी ओर शहीद नरेश के पिता राम नारायण यादव अपने आप को संभालते हुए कहते हैं बेटे ने कहा था पिता जी मैं जिस जगह तैनात हूं वह काफी खतरनाक जगह है, वहां अक्सर नक्सलियों द्वारा हमले होते ही रहते हैं. सरकार जो भी करे मगर एक बाप ने अपना एकलौता बेटा खौया जबकि एक पत्नी व तीन बच्चे ने के सर से एक बाप का साया उठ गया.

