Home मुख्य इस्लामी संस्कृति है मदरसा : शाहनवाज। Voice of Darbhanga
मुख्य - February 22, 2017

इस्लामी संस्कृति है मदरसा : शाहनवाज। Voice of Darbhanga

IMG_20170222_212137जाले : मैजूदा समय शैक्षणिक क्रांति का दौर है, जिसमें आपको खुद को साबित करने के कई अवसर मौजूद हैं. दीनी तालीम के साथ दुनियाबी तालीम की जरूरत है. देश के विकास में मदरसों का प्रमुख भूमिका रही है. मदरसा मुसलमानों का मिल्ली पहचान है, यह इस्लामी संस्कृति है. लेकिन उसके साथ-साथ आप अपने बच्चों को कम्प्युटर की भी शिक्षा दें. यह इस बक्त की जरूरत है अगर आप बक्त के साथ चलेंगे नहीं तो कभी दुनियां के साथ कदम से कदम मिलाने में सफल नहीं हो सकते।यह उदगार भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शैयद शाहनवाज हुसैन ने मंगलवार की देर रात सैयद मो0 जेया साहव के छोटे पुत्र सैयद सारिक जेया के शादी के वलीमा के अवसर पर निजी कार्यक्रम में शिरकत के मौके पर दुनियां के इस्लामिक विद्वान काजी मौलाना मुजाहिदुल, इस्लाम काशमी द्वारा स्थापित जाले के मदरसा दारुल उलूम सबिलुल फला में छात्रों व शिक्षको को संबोधित करते हुए कहा. आगे उन्होंने कहा कि याद रखिए आप खुद को तभी साबित कर सकते हैं, जब आप समय के परिवर्तन  और उसकी उलटफेर को महसूस करते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का फैसला करेंगे, वरना आप जीवन के किसी मोड़ पर अपना हौसला खो दिया या अपने हालात किसी रंजिश का शिकार हो गए तो, कहीं आप अपनी मंजिल का पता न भूल जाएं. जिस कारण आपको रोष का शिकार न होना पड़े. भविष्य में परेशानी का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़े. इसीलिए मैं आपसे यह गुजारिस करना चाहूँगा कि आप मौजूदा शैक्षिक परिदृश्य में खुद को व्यावहारिक रूप में साबित करने के लिए प्रतिबद्ध करें. मदरसा के संस्थापक व मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष काजी मौलाना मुजाहिदुल इस्लाम कासमी साहव के संदर्भ में इन्होंने यह कहते हुए सभी को चौका दिया कि वह न होते तो आज मैं राजनीती के इस मुकाम पर नहीं होता. उन्होंने मुझे राजनीती का पहला पाठ पढ़ाया जिस कारण मैं यहां हूँ. मैं उनके ऊँचे हैसियत के कारण किसी को यह नहीं कहा कि वे हमारे बहुत करीबी ही नही हमारे अपने रिश्तेदार है. यहां के आधा लोग हमारे रिश्ते में अपने ही नही बहुत नजदीकी रिस्तेदार है. जाले जब उठेगा तो और मुझे बल मिलेगा. काजी साहव ने मुझे राजनीती की पहली सीढ़ी दिखाई और उसपर चढ़ता चला गया. यह मस्जिद व मदरसा है, मैं यहां सियासत की बात नहीं रखूंगा, लेकिन इतना कहूंगा कि आप अपने आपको उस बुलन्द तालमी मरकज को इतना बुलन्द करे की हर सक्श में काजी साहब की नूरानी ताकत झलके. इस मौके पर मुफ़्ती आमिर मजहरी, मौलाना असलम सबिली ने उनका स्वागत किया. इस मौके पर तारिक जेया, निशात नयाजी, अब्बास काशमी, कार्यकम का संचलन मौलाना मुजफ्फर रहमानी ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मुज्जरुल इस्लाम ने किया.

Share

Leave a Reply