Home मुख्य जाट और पटेल समाज की तरह आन्दोलन की चेतावनी को मजाक न समझे सरकार: नजरे आलम
मुख्य - August 29, 2016

जाट और पटेल समाज की तरह आन्दोलन की चेतावनी को मजाक न समझे सरकार: नजरे आलम

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दरभंगा: आज ऑल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के कार्यालय लालबाग दरभंगा में एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नजरे आलम ने की। बैठक को सम्बोधित करते हुए श्री आलम ने बिहार सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जब से इनकी नई सरकार बनी है और अशोक चैधरी को शिक्षा मंत्री बनाया गया है तब से बिहार में शिक्षा का स्तर पूरी तरह खत्म होता जा रहा है। शिक्षा मंत्री खुद को राहुल गाँधी का करीबी बताकर महागठबंधन की सरकार को धौंस में लेकर अपनी मर्जी से काम करते है और ऐसा प्रतीत होता है कि यह भी आर0एस0एस0 के ही इशारे पर अल्पसंख्यकों के साथ लगातार अन्याय करते जा रहे हैं। श्री आलम ने आगे कहा कि उर्दू/बंगला टी0ई0टी0 वालों की बहाली को सरकार मजाक बनाकर रख दिया है। आये दिन उर्दू/बंगला टी0ई0टी0 वालों को सरकार ठग रही है लेकिन बहाली नही कर रही है जब्कि खुद माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने अभी एक सप्ताह पहले सैकड़ों की संख्या मंे संस्कृत शिक्षकों की बहाली का एलान किया था। मैं माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी से पुछना चाहता हूँ कि किया उनकी सरकार के पास अल्पसंख्यकों को नौकरी देने के लिए रूपया ही नहीं रहता है लेकिन दूसरे समुदाय के लिए उनकी सरकार में पैसे की कमी नहीं होती है। आखिर एैसा क्यों किया जाता है अल्पसंख्यकों के साथ। किया उन्हंे सिर्फ सत्ता के समय ही अल्पसंख्यकों की अहमियत समझ में आती है और सत्ता मिलते ही उन्हें उनकी औकात बता दी जाती है। बैठक को सम्बोधित करते हुए श्री नजरे आलम ने साफ तौर पर कहा कि पिछले सप्ताह ही मैने घोषाण किया था कि अगर सरकार और शिक्षा मंत्री उर्दू/बंगला टी0ई0टी0 वालों के साथ अन्याय बन्द नहीं किया और अक्टूर माह तक सभों कि बहाली नहीं कि गई तो अल्पसंख्यक समुदाय जाट और पटेल समाज की तरह आन्दोलन करने पर मजबूर होंगा। सरकार इस मामले को ठंडे बस्ते में न डाले और ना ही मजाक समझे अगर जल्द कोई ठोस कदम सरकार ने नही लिया तो नवम्बर के पहले सप्ताह से आन्दोलन का आरम्भ किया जायगा जिसकी सारी जवाबदेही बिहार सरकार की होगी। श्री आलम ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब 27000 की बहाली नहीं करनी थी तो घोषणा ही क्यों किया। ऐसा लगता है कि बिहार सरकार के मुखिया भी आर0एस0एस0 के दबाव में ही काम कर रहे हैं ताकि मुसलमान बड़ी संख्या में बेरोजगार रहे और शिक्षा से भी दूर हो जाय और अल्पसंख्यक समुदाय सिर्फ इनके लिए वोट बैंक बना रहे। श्री आलम ने कहा कि सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती है तो तो उर्दू आबादी इसके विरूध आन्दोलन करेगी। बैठक को मकसूद आलम पप्पु खान, मिर्जा नेहाल बेग, मो0 अरशुद्दीन दुलारे, शाह इमादुद्दीन सरवर, विजय कुमार झा, असद रशीद नदवी, जावेद करीम जफर, हेमायुन शैख, अब्दुल कुद्दुस सागर, सरवर अली फैजी, जुबैर आलम आदि ने भी सम्बोधित किया और कहा कि सरकार उर्दू/बंगला टी0ई0टी0 वालों को जल्द रोजगार से जोड़े और चुनाव के समय किए गए वादे को पूरा करे सिर्फ पटना के अल्पसंख्यकों तक ही सरकार को सिमित न रखें। 

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