
खैरा कांड: लूट को फर्जी बताने वाली भाकपा माले ही दिखी दो फाड़। Voice of Darbhanga

दरभंगा: बहादुरपुर के पतोर ओपी अंतर्गत खैरा बिस्किट फैक्ट्री लूट कांड तथा उसके बाद माले द्वारा इसे फर्जी बताकर ग्रामीणों को फसाये जाने के बाद एक बड़ा प्रश्न सामने आ गया था कि लूट हुई या नही। इस पर वॉइस ऑफ़ दरभंगा ने आज जब पड़ताल की तो लूटकांड की बात और इसके जड़ में अफवाह होने की बात सत्य प्रतीत होती दिखी। स्थानीय लोगों के साथ साथ जब भाकपा माले के जिला कमिटी के मेंबर रोहित सिंह ने भी बयान दिया कि उनके जाँच में भी यह बात सामने आयी कि सामान निकला और रिकवर हुआ,तो इस बयान के बाद लूट को फर्जी बताने वाली भाकपा माले ही दो फाड़ दिखी। हलाकि पार्टी के जिलासचिव ने मामले में पार्टी का बचाव करते हुए कहा कि रोहित सिंह जाँच केलिए अधिकृत नही थे, अतः उनका बयान आधिकारिक नही माना जाएगा।
वॉइस ऑफ़ दरभंगा से बात करते हुए फैक्ट्री के मालिक पंकज सिंह ने बताया कि घटना एक अफवाह के कारण हुई। कुछ लोगो ने अफवाह उड़ा दिया कि फैक्ट्री पर छापा पड़ा है। इसी पर लोग टूट पड़े और लूट मच गयी।
श्री सिंह ने कहा कि पुलिस पदाधिकारियों के सामने लोगों ने स्वीकार किया तथा पुलिस के दवाब पर कुछ लोगो ने सामन वापस भी किया। भाकपा माले के अभिषेक कुमार पर सीधा आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्होंने इस मुद्दे को वेवजह तूल दिया है उससे उनकी भी भूमिका संदिग्ध लग रही है। जब उनके पार्टी के कार्यकर्त्ता और ग्रामीण भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर रहे हैं कि अफवाह सुनकर दौड़े और पंच, वार्ड मेंबर तथा पंचायत समिति सदस्य ने अगले दिन डीएसपी के सामने लोगो से जब्त कर 100 किलो बिस्किट लाकर जमा किये और पुलिस ने अगले दिन का समय दिया कि लूटा हुआ सारा सामान वापस् करवा दीजिये तो कोई मामला नही बनेगा। श्री सिंह ने कहा कि वहीँ उन्हें बिजनेस करना है और स्थानीय लोग उनके दुश्मन नही है। अतः वह भी सामाजिक स्तर पर हल को तैयार थे तो अचानक माले के अभिषेक कुमार द्वारा अनावश्यक तूल देकर मामले को उलझाने की राजनीति करना अब उन्हें संदेह के घेरे में खड़ा करता है। रही बात लोन के आरोप की तो एक मधुबनी स्थित के साथ उनकी कुल तीन फैक्ट्रियां है और तीनों प्रॉफिट में हैं। 12 साल से बिजनेस कर रहे हैं और कोई आजतक बैंक से रिलेशन खराब नही हुआ है।
पूरी घटना को देखने से प्रतीत होता है कि अब इस पुरे मामले में सच तभी सामने आयेगा जब पुलिस की जांच अफवाह की जड़ में पहुंचेगी कि क्या यह प्रायोजित अफवाह था, और अगर हाँ तो इसके पीछे कौन थे।

