
साहित्यकार शंभु अगेही पंचतत्व में विलीन।

दरभंगा : साहित्यकार, वरिष्ठ शिक्षक और पूर्व निगम पार्षद शंभु प्रसाद सिन्हा अगेही आज पंचतत्व में विलीन हो गये. दरभंगा के शुभंकरपुर स्थित सतीस्थान श्मशान घाट में उनके पुत्र अमिताभ कुमार सिन्हा ने मुखाग्नि दी. इस मौके पर भारी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार, बुद्धिजीवी और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे. ज्ञात हो कि अगेही विगत कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. उनका ईलाज पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में चल रहा था. जहां बुधवार की देर रात लगभग 10:30 बजे उन्होंने अंतिम सांसे ली. आज उनके निधन की खबर सुनकर उनके शुभंकरपुर स्थित आवास पर लोगों का तांता लग गया. विधायक संजय सरावगी, पूर्व महापौर ओम प्रकाश खेड़िया, पूर्व उप महापौर प्रबोध कुमार सिन्हा, डॉ. अयुब राईन, जितेन्द्र कार्यी, डॉ. कृष्ण चन्द्र झा मयंक सहित साहित्यकारों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों आदि ने उन्हें पुष्पांजलि दी. सनद रहे कि अगेही का जन्म 8 जनवरी 1941 को हुआ था. मूल रूप से शिक्षक रहने के साथ-साथ उन्होंने लम्बी साहित्य साधना की. इस क्रम में उन्होंने हिन्दी, बज्जिका, मैथिली की डेढ़ दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखी. जिसका प्रकाशन भी हो चुका है. 1964 ई. में हिन्दी के जलतरंग का प्रकाशन हुआ था और उसके बाद उनकी कलम नहीं रूकी. उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन, प्रबंध सम्पाद किया था. प्रवासी भारतीय महेश ठाकुर की तीन पुस्तकों का सम्पादन, डॉ. प्रकाश चन्द्र वर्मा की एक पुस्तक और गया के अयोध्या प्रसाद की 6 पुस्तकों का उन्होंने सम्पादन किया था. कबीरपंथी समुदाय के ‘आधुनिक संत : बौआ साहब’ पुस्तक काफी चर्चा में रही. इसके अलावा श्यामा माई एक परिचय पुस्तक ने उन्हें एक पहचान दी थी. उनके निधन की खबर सुनने के पश्चात अखिल भारतीय कायस्त महासभा की शोकसभा का आयोजन डॉ. ओंकार प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई. जिसमें प्रबोध कुमार सिन्हा, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, दीपक कुमार सिन्हा, सुजित मल्लिक, संतोष कुमार सिन्हा, नवीन वर्मा, प्रकाश चन्द्र प्रभाकर, शंभु सौरभ, अरूण कुमार दास आदि ने भाग लिया.

