नायाब मेधा घोटाला का पर्दाफाश, तीन साल बाद छात्र जेल में।

दरभंगा: सूत्र
दरभंगा पुलिस, बिहार राज्य शिक्षा बोर्ड एवम एक मैट्रिक छात्र के बीच की अनसुलझी केमेस्ट्री किसी को भी हैरत में डाल देने के लिए काफी है। वैसे पुलिस ने लहेरीयासराय पंडासराय के छात्र मनीष कुमार को तीन साल बाद आज जेल भेज दिया है। मामला बर्ष 2013 की मैट्रिक परीक्षा के दौरान का है। बहेड़ा के जे एन एच उच्च विद्यालय में परीक्षा दे रहे मनीष पर आरोप था कि वह गणित की कॉपी अपने साथ लेकर भाग गया था । 18.3.13 को परीक्षा केंद्र के अधीक्षक ने इस आरोप में मनीष के खिलाफ बहेड़ा पीएस में एफआईआर भी दर्ज कराया था। वहीं मनीष का कहना था कि वह उक्त विषय की परीक्षा में उपस्थित था और पंजी में अपनी उपस्थिति भी बनाई है। मजे की बात यह है कि उसी दौरान मनीष ने बोर्ड को भी लिखकर दिया था कि मेरे साथ इस तरह की घटना हुई है जबकि मैं निर्दोष हूँ। इधर पुलिस ने अपने अनुसन्धान में केस को सत्य करार देते हुए मनीष पर आरोप पत्र भी गठित कर दिया। इसी आलोक में उसकी गिरफ्तारी भी हो गयी।
इस जगह बता देना आवश्यक है कि केस होने के बाद भी मनीष को गणित में 52 अंक आ गया और इस आधार पर उसने इंटर भी पास कर लिया।
अब सवाल यह कि अगर छात्र अनुपस्थित था तो उसे गणित में 52 नम्बर आया कैसे? फिर अगर मनीष परीक्षा में शामिल था तो केस झूठा ? सोचनीय है कि क्या बिन कॉपी का ही उसे गणित में अंक दे दिया गया? या फिर अपनी जान बचाने केंद्राधीक्षक ने मनीष को मोहरा बनाया? इतना ही नहीं, यह भी सम्भव है कि पुलिस को अपनी कमीज साफ रखने के लिए भी मनीष को देर से ही सही गिरफ्तार करना पड़ा।
माजरा जरा पेचीदा जरूर हो गया है और इसमें गहन जांच को जरूरत है। जो भी हो मनीष का शैक्षणिक जीवन अवश्य प्रभावित हो गया है।

