सिर्फ विधायकी नही, संगठन में कार्यकर्ताओं केलिए भी काम करना चाहते हैं जीबेश कुमार।

साक्षत्कार-अभिषेक कुमार
भाजपा के जाले विधानसभा से 42 वर्षीय युवा विधायक जीबेश कुमार 1989 से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 1998 से भाजपा में सक्रिय हुए। 2005 के विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी केलिए किये गये इनके योगदान ने भाजपा में इनकी छवि नेता के रूप में उभारी और संगठन के कहने पर पूर्णकालिक सक्रियता दिखानी शुरू कर दी। जनता के मुद्दों पर आंदोलनों में आगे आने लगे और एक एक लोगों से जुड़े। इनका पैतृक निवास स्थान भी जाले के चंदौना में ही है। अतः क्षेत्र के लोगों को विधायक खोजने पर मिलते या नही, जीवेश कुमार रात को 12 बजे भी उपलब्ध रहते थे। इन्ही कारणों से इनका कद पार्टी में बढ़ा और 2010 के चुनाव में उम्मीदवारी लगभग तय हो गयी थी। पर टिकट नही मिला। परंतु समर्थकों के दवाब में निर्दलीय चुनाव लड़ गये जिसे ये अपनी भूल मानते हैं। इन्ही मुद्दों पर हमसे जब बात हुई तो इनके साथ पार्टी के कद्दावर नेता और भाजपा के जिलामंत्री अशोक नायक भी उपस्थित थे जिन्होंने कुछ और ख़ास बाते बताईं जिनके प्रमुख अंश आज रखने जा रहे हैं हम।
“कार्यकर्ताओं से ही बने नेता”
बातचीत के दौरान जीबेश कुमार ने कहा कि वह विधायक के साथ पार्टी जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं केलिए भी अपनी सक्रीय भूमिका निभाना चाहते हैं। वे जानते हैं कि कभी कभी काबिल होने के वाबजूद कार्यकर्ताओं को उनका उचित हक नही मिल पाता क्योंकि पार्टी को बहुत सारे बातों को देखना पड़ता है। ऐसे में समर्पित कार्यकर्ताओं का हौसला टूटता है। इसलिए वे संगठन के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा कर कार्यकर्ताओं केलिए काम करना चाहते हैं ताकि पार्टी का नेता कार्यकर्ताओं के बीच से ही निकले। संगठन एवं कार्यकर्ताओं द्वारा जहाँ भी कोई कार्यक्रम होगा, सभी जगह वह उनके बीच उपस्थित रहने का प्रयास करेंगे।
“गामी जी से व्यक्तिगत मनमुटाव हुआ पर संगठन के बेहतरीन संचालक थे”
2010 में बागी होकर चुनाव लड़ने के कारण जब उन्हें पार्टी से निकालने की तैयारी चल रही थी तो चुनाव से पहले अमरनाथ गामी द्वारा उनके विरोध में दिया गया कथन कि जीबेश कुमार पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नही है, उनके निलंबन को रोकने का आधार बना। क्योंकि जब सदस्य ही नही तो निलंबन कैसे। हालांकि उस समय प्रदेश नेतृत्व के सामने जगदीश साह ने एभीबीपी से जुड़े रहने का नाम बोला तो प्रदेश अध्यक्ष ने भी कहा कि तब इन्हें अलग से सदस्यता की जरूरत नही है। गामी जी के पार्टी छोड़ने के बाद उनसे कैसा सम्बन्ध है जैसा कड़ा सवाल पूछने पर भी खुल कर जवाब देने में नही हिचके। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से वे मानते हैं कि गामी जी संगठन के महत्वपूर्ण स्तम्भ थे और उनके लिए भी आदर्श नेता थे। पर संगठन सर्वोपरि होता है। बहुत ज्यादा कुरेदने पर कि क्या वे मानते हैं कि ताजा हालातों में जब कार्यकर्ताओं के बीच भी गामी जी मांग पार्टी में लाने की उठ रही तो वे इस पर कुछ कहेंगे! इस पर जीबेश कुमार ने बस इतना कहा कि वे संगठन के ईमानदार सिपाही है। यदि गामी जी पार्टी केलिए अहम स्तम्भ थे तो वे पार्टी के बाहर क्यों हैं, ये संगठन देखे। यही सवाल जब हमने भाजपा के जिलामंत्री अशोक नायक से पूछा तो उन्होंने साफ़ साफ़ कहा कि जब वे पार्टी के कार्यकर्ता हैं तो कोई व्यक्तिगत विचार नही रह जाता। पार्टी की विचारधारा ही उनकी विचारधारा है। साथ ही साथ यह भी कहा कि उन्हें पद मिले या न मिले,वे हमेशा से भाजपाई थे और आजीवन भाजपाई ही रहेंगे।
“शहर के संगठन के अलावा होने वाले कार्यक्रमो में भी बुलाने पर निश्चित आएंगे”
जब उनसे हमने पूछा कि जाले के अलावा कहीं संगठन या सामाजिक संगठन के तरफ से कार्यक्रम आयोजित होता है या कोई प्रमुख मुद्दा या समस्या पर आंदोलन होता है तो क्या वे भी सक्रियता दिखाएंगे या अकेले नगर विधायक के मत्थे ही छोड़ देंगे क्यूंकि बहुत सारे कार्यकर्त्ता अब मजबूती प्रदर्शित करने केलिए नगर विधायक के साथ इनकी भी उपस्थिति के इच्छुक दिखते हैं। जीबेश कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि जहाँ जनता एवं कार्यकर्त्ता से जुड़े मुद्दे की बात हो तो वो हर मंच पर उनके साथ कन्धा से कन्धा मिला कर खड़े रहेंगे।
“टिकट दावेदारी से निराशा में वाबजूद अशोक नायक ने मेरी जीत में अहम भूमिका निभायी”
संगठन केलिए समर्पण क्या होता है, इसका एक जीवंत उदाहरण उन्होंने पार्टी के जिलामंत्री और चुनाव के समय जाले विधानसभा के प्रभारी अशोक नायक के रूप में भी दिया। उन्होंने बताया कि टिकट के दावेदार 4-5 थे जिन्हें टिकट नही मिला। बाकी तो थोड़ी नाराजगी भी दिखाए पर सिर्फ अशोक नायक ही ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने पूरी तन्मयता दिखाई और उनके जीत में अहम योगदान किया।
ये थे भाजपा के जाले विधायक जीबेश कुमार से बातचीत के प्रमुख अंश। पूरा भाग कल रात 10 बजे।
क्रमशः जारी……..

