
मोदी ने तीन साल में जितने के लिबास बदले उसका दस फीसदी संपत्ति भी लालू के पास नही: फातमी। Voice of Darbhanga

दरभंगा: पूर्व केन्द्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी ने आरोप लगाया है कि आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का बाबरी ढ़ांचे के गिराए जाने संबंधी मामले में फिर से लपेटे में आना बीजेपी की अन्दर की लड़ाई का नतीजा है. उन्होंने कहा कि मार्गदर्शक मंडल के नेताओं को हाशिए पर धकेलने की ये एक और अहम कड़ी है. खासकर तब जबकि आडवाणी के राष्ट्रपति और जोशी के उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवारी की अटकलें तैर रही हैं. ऐसे में सीबीआई की अतिशय सक्रियता संदेह पैदा करती है.
दरभंगा में गुरूवार को प्रेस मीट में वरिष्ठ आरजेडी नेता ने कहा कि बुधवार को आए कोर्ट के निर्देश के बाद उमा भारती को नैतिकता दिखाते हुए मंत्री पद छोड़ देना चाहिए.
फातमी ने कहा कि वे कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हैं. उन्होंने साफ किया कि मसला राम मंदिर का नहीं है बल्कि ये मामला एक मस्जिद के तोड़े जाने से जुड़ा है और कोर्ट ने उस पर निर्णय दिया है. कोर्ट ने लखनउ में चल रहे मामले के साथ ही रायबरेली कोर्ट के मामले को जोड़ने को कहा है. अब इन नेताओं पर मस्जिद को तोड़े जाने की साजिश में शामिल होने का मामला चलेगा.
उधर लालू प्रसाद के परिवार पर रोजाना किए जा रहे खुलासे पर फातमी ने सुशील मोदी को आड़े हाथों लिया. उन्होंने दावा किया कि तीन साल में पीएम ने जितने लिबास पहने हैं उसकी कीमत का दस फीसदी भी लालू प्रसाद की संपत्ति नहीं है. उन्होंने ये भी दावा किया कि सीबीआई और ईडी को लालू की किसी गलत संपत्ति की जानकारी नहीं है.
फातमी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी के शासन में सांप्रदायिक विद्वेष और देश विरोधी ताकतें सर उठा रही हैं साथ ही अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है. ऐसे समय में आरजेडी सुप्रीमो विपक्षी एकजुटता की देशव्यापी मुहिम में लगे हैं. इससे बौखला कर सुशील मोदी के जरिए लालू प्रसाद पर हमले किए जा रहे हैं. फातमी ने उम्मीद जतायी कि जल्द ही साल 1977, 1989, 1996 और 2004 जैसी विपक्षी एकजुटता आकार ले लेगी.
पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने साफ किया कि बीते समय कुछ वजहों से लालू से नाराजगी थी लेकिन कभी भी उनके या उनके परिवार के खिलाफ कुछ नहीं बोला. फातमी ने कहा कि लालू उनके अनडिस्प्यूटेड लीडर हैं. लालू की विपक्षी एका की कोशिश में पूरा साथ देने की बात फातमी ने कही.

