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मुख्य - January 25, 2017

ज्यादातर प्रेस लिखे गाड़ियों के कागजात पूरे नही होते या चोरी के भी होते हैं! Voice of Darbhanga

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दरभंगा। अभिषेक कुमार

जिले के सड़को पर हाल के दिनों में बाइक पर प्रेस लिख घूमने वाले तथाकथित मीडिया पर्सन की बाढ़ सी आ गयी है। तथाकथित बैनर पैसे लेकर सैकड़ो की संख्या में बिना किसी आहर्ता के किसी को भी प्रेस कार्ड बना देने की सुचना भी विश्वस्त सूत्रों से मिली है। प्रेस लिखवाने का फायदा सबसे बड़ा ये होता है कि अधिकतर पुलिस इसे चेक नही करती। इसलिए गाडी के कागजात हैं या चोरी के हैं, ये भी पता नही चलता। रही बात इंश्योरेंस की, विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गाड़ी खरीदने के समय जो एक साल का इंश्योरेंस हो गया सो हो गया, एक साल पूरा होने के बाद 90% प्रेस लिखी गाड़ियों का इंश्योरेंस नही होता। हेलमेट नही पहनना और चेकिंग के दौरान दादागिरी से धौंस दिखाते निकल जाना, इनकी ख़ास पहचान है। ऐसे फर्जी रूप से घूमने वाले और बैनर का दुरूपयोग करने वाले प्रेस कर्मियों पर रोक तभी लगेगा जब प्रेस लिखी सारी गाड़ियों की सख्ती से चेकिंग शुरू हो। सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार बाहर से चोरी कर लायी गयी गाड़ियों पर फर्जी नम्बर प्लेट भी चढ़ाये भी इन प्रेस लिखे गाड़ियों में मिल सकते हैं। नम्बर प्लेट की हकीकत यह है कि यदि कोई पुराना गाड़ी कबाड़ा हो गया और उनका कागज है तो चोरी की खरीदी गाडी पर उसी गाडी का नम्बर प्लेट लगा कर गाड़ी चला लिए। पेपर तो पुराना वाला है ही। अब प्रेस लिखे गाड़ियों को कोई चेक नही करता तो चेचिस नम्बर आदि का मिलान कौन करेगा भला!

वॉइस ऑफ़ दरभंगा को विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी सटीक या अपूर्ण भी निकलती है तो क्या वरीय अधिकारियों द्वारा संज्ञान लेकर सारे प्रेस लिखे गाड़ियों की सघन जांच जनहित में जरुरी नही है? वरना वह दिन दूर नही जब अपराधियों द्वारा हथियारों के सप्पलाई आदि का आसान माध्यम प्रेस लिखी गाड़ियां हो जाए।

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