
संस्कृत बोर्ड का परीक्षाफल अभी तक प्रकाशित नही होने से छात्रों का भविष्य संकट में। Voice of Darbhanga

दरभंगा। समीर झा
बिहार में राज्य सरकार की उदासीनता और बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अक्षमता के कारन 2016 वर्षीय मध्यमा का परीक्षाफल प्रकाशित नहीं होने से राज्यभर के संस्कृत पढ़ने वाले हजारो छात्र-छात्राओं का भविष्य संकट में पड़ गया है।
दरभंगा जिले तारडीह प्रखंड के कठरा ग्राम निवासी बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पूर्व सदस्य श्री अरुण कुमार झा ने वॉइस ऑफ़ दरभंगा को बताया क़ि मैट्रिक के समतुल्य माध्यमिक स्तर के संस्कृत विद्यालयों में पढ़ने वाले राज्य भर के छात्र-छात्राओं को संस्कृत शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित मध्यमा की परीक्षा में शामिल कराया जाता है । परिणाम के आधार पर आगे की पढाई के लिए नामांकन होता है।
विदित हो की बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड,पटना द्वारा 2016 वर्षीय मध्यमा परीक्षा का आयोजन किया गया । मार्च 2016 में परीक्षा सम्पन्न हुई । अप्रैल मई 2016 में हीं उत्तर पुस्तिका का मूल्याङ्कन भी करा लिया गया किन्तु आज तक परीक्षाफल का प्रकाशन नहीं हो पाना घोर आश्चर्य का विषय है और दुखद भी । इसमें शामिल छात्रों का एक साल का समय नष्ट होने के साथ-साथ आगामी वर्ष की परीक्षा पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है । इतना हीं नहीं इससे संस्कृत विद्यालयों की विश्वसनीयता भी खतरे में होगी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में व्याप्त अराजकता उजागर होने के बाबजूद शिक्षा विभाग का ध्यान इन बोर्डों के क्रिया कलाप से अनभिज्ञ रखना राज्य के शिक्षा विभाग पर प्रश्न पैदा करता है ।
माननीय शिक्षा मंत्री जी से आग्रह है की देववाणी के साथ अन्याय न होने दें और शीघ्र उक्त परीक्षाफल का प्रकशन करवाने हेतु ठोस कार्रवाई करें साथ हीं बिलंब के लिए सम्बंधित अधिकारीयों भी उचित करवाई होनी चाहिए।

