
भ्रष्ट ट्रैफिक इंचार्ज की वजह से ध्वस्त हो गयी है शहर की ट्रैफिक व्यवस्था! Voice of Darbhanga

दरभंगा: शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने केलिए कई प्रयास किये गए। कभी कभी कुछ असर भी दिखा। पर इधर हाल के महीनो में ट्रैफिक वयवस्था पूर्णतः चरमरा गयी है। दरअसल कप्तान के सही होने का प्रभाव टीम पर पड़ता है। एक ट्रैफिक इंचार्ज के बारे में लोगबाग मे जो प्रसिद्द था वह बीच सड़क पर दिख गया। कालेधन के बंटवारे को लेकर अपने मातहत से बीच सड़क पर संग्राम कर लिए तो उन्हें हटाया गया। इसके बाद करीब साल बाद ट्रैफिक में कृष्णा प्रसाद को ट्रैफिक का प्रभारी बनाया गया। इनके कार्यकाल में कुछ हद तक ट्रैफिक की सक्रियता दिखी। पर इनके पूर्व इंचार्ज के कार्यकाल में नो एंट्री में छूट केलिए हज़ार रूपया प्रति महीना प्रति ट्रैक्टर की जो वसूली की परंपरा थी वह ध्वस्त हो गयी। यह बात स्पष्ट रूप से ट्रैक्टर मालिकों से सुनने को भी मिला। पर आमदनी बिलकुल बन्द हो जाना विभाग को रास नही आया और भाड़ में जाय जनता का भला, पहले कमाऊ पूत को फिर से लगाया जाए।
इसी आधार पर शायद बहुत संक्षिप्त कार्यकाल में इन्हें हटा कर काली कमाई के बादशाह को कमान दी गयी यातायात की। बस फिर क्या था। शहरवासी अब खुद आँखों से देखते हैं और महसूस् कर रहे हैं समस्या। कभी कभी ऐसा भी होता है कि बड़े बड़े पदाधिकारियों की गाड़ियां जाम में फंस जाती हैं उनके आँखों के सामने वन वे में गाड़ियां जाती दिखी हैं। पर कमाऊ पूत पर कोई कारवाई नही होती है। गत शुक्रवार को एक बड़ा सबूत घण्टो गवाही देता रहा। नो एंट्री तोड़ रहा दस चक्का वाला गिट्टी लदा ट्रक सैदनगर काली मंदिर रोड में मोड़ने में फंस गया। और चार पांच घण्टे से अधिक फंसा रहा। इस खुली दुस्साहस के पीछे ट्रैफिक इंचार्ज का प्रश्रय नही तो और क्या। इसी प्रकार गत 25 नवम्बर को एक मीडिया से जुड़े व्यक्ति द्वारा सुचना देने पर खाजासराय में तीन ट्रैक्टरों को एक साथ इन्होंने नो एंट्री में खुद को ट्रैफिक इंचार्ज कहने वाला पीके सिंह नामक एक पुलिस वाले ने पकड़ा। एक ट्रैक्टर हायाघाट प्रखंड क्षेत्र के बालू गिट्टी विक्रेता सह राजद नेता की गाड़ी भी थी। कानो में कानाफूसी, आँखों में इशारे हुए और तीनो ट्रैक्टर बिना जब्त किये लोहिया चौक की तरफ बेधड़क नो एंट्री में दौड़ गयी।

ऐसा नही है कि ध्वस्त ट्रैफिक व्यवस्था पर वरीय पदाधिकारियों की नजर नही पड़ती। पर शायद जनता की समस्या से ज्यादा चिंता आजकल कमाऊ पूत की सबको होती है। इसलिए नजर पड़ने पर भी सबकुछ शायद नजरअंदाज हो जाता है।

