Home मुख्य धान अधिप्राप्ति और रब्बी बुआई में केन्द्र व राज्य की दोहरी मार झेल रहे हैं किसान। Voice of Darbhanga
मुख्य - November 26, 2016

धान अधिप्राप्ति और रब्बी बुआई में केन्द्र व राज्य की दोहरी मार झेल रहे हैं किसान। Voice of Darbhanga

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दरभंगा। केन्द्र और राज्य सरकार के दोहरे मार यहां के किसान झेल रहे हैं. आलम यह कि धान की फसल के लिए किया गया मेहनत और उस पर किए गए व्यय वसूल होने का दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है. वहीं नोटबन्दी ने भी ऐसे ही समय में किसानों की कमर भी तोड़ रही गई। खाद-बीज के किल्लत के कारण रब्बी की बुआई संभव नहीं हो पा रही है. ऊपर से खेतों में नमी खत्म होती जा रही है. राज्य सरकार ने पैक्स के माध्यम से धान क्रय करने का एलान किया, जो कि पिछली बार भी किया था. इतना ही नहीं टीवी पर किसानो से धान खरीद के लिए बड़ा बड़ा विज्ञापन हर समय आ रहा है. लेकिन किसानो से धान की खरीद शुरू नहीं हुई है. किसानो का कहना है कि मोदी सरकार ने शादी वाले परिवारों के लिए ढाई लाख निकासी की बात कही थी लेकिन रिजर्व बैंक ने जो गाईड लाईन जारी किए उसके कारण लोग को अपना राशि निकालने में सक्षम नहीं हो पा रहे है. इसी तरह धान खरीद के लिए राज्य के अफसरसाही ने पैक्सों के साथ जो नियम बना दिए उसके कारण किसान से पैक्स धान नहीं खरीद रहा है. इसी तरह दोहरी मार किसान झेल रहे हैं. अब तो टीवी पर धान की सरकारी खरीद का विज्ञापन आता है तो किसान चिढ़ने लगते हैं. पिछले साल भी यही हाल हुआ था. चूंकि पैक्सो को चावल बनाकर एसएफसी को देना है लेकिन कोई भी पैक्स इसके लिए सक्षम नहीं है और न कही सरकारी स्तर पर राईस मिल की स्थापना है. पिछले वर्ष मिलर के यहां जिन पैक्सो से धान जमा कराया गया, उसमें अधिकांश मिलर ने चावल दिया ही नहीं जिसके कारण कई पैक्सो पर कारवाई हो चुकी है. ऐसे में पैक्स अध्यक्ष कहते हैं कि अब हमलोंगे से यह संभव नहीं है. किसानो का कहना है कि राज्य में जब एनडीए की सरकार थी तब पैक्स को चावल बनाने का भार नहीं था. लेकिन अब पैक्स ही चावल बनावें यही कारण है कि किसानो के गाढी मेहनत से उपजाए धान की औने-पौने कीमत व्यापारी लगा रहे हैं. विडंबना है कि औने-पौने कीमत पर भी तत्काल राशि भुगतान करने के लिए व्यवसायी तैयार नहीं है. वहीं बिरौल सूत्र के मुताबिक बिरौल अंचल क्षेत्र में धान क्रय केंद्र नही होने से औने-पौने कीमत पर धान बेचने को विवश हो रहे हैं. धानक्रय में लिपत बिचौलिए सरकार द्वारा निर्धारित मूलय के विपरीत आठ सौ नौ सौ रुपये में किसानों से घानक्रय कर अपनी गोदाम भर रहे है जो धान बाद मे सरकारी क्रय केंद्र पर पहुंचेगी. इतना ही नहीँ बिरौल मे सरकारी घोषणानुरूप पटवन हेतु किसानो को डीजल अनुदान से पूर्व मे भी वंचित रखा गया.

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