
दो दिवसीय विराट ज्ञान यज्ञ का हुआ भव्य समापन। Voice of Darbhanga

कुशेश्वरस्थान : दो दिवसीय बिराट ज्ञान यज्ञ के कुशेश्वरस्थान उच्च विद्यालय के प्रांगण में गुरूवार को भव्य रूप से समाप्त हुआ। परम पूज्य स्वामी व्यासा नन्द जी महाराज ने प्रवचन के दौरान मुख्य रूप से सत्य संग की महिमा और ईश्वर की भक्ति पर विस्तार से बताया स्वमी जी ने बताया कि संतो के संघ को सतसंघ कहते हैं. दूसरे अर्थ में सत्य के संग को सतसंग कहते हैं. सतसंग से ही व्यक्ति के अंदर ज्ञान का उद्भव होता है और सच्चे संत से सत्यगुरु का सरण प्राप्त होती हैं. सतसंग से ही ईश्वर की भक्ति का मार्ग व्याप्त होती है. ईश्वर भक्ति के अंदर गुरु और ध्यान साधना की पद्धति प्रस्सत होती हैं जो गुरु पूर्ण होते है वे परमात्मा को प्राप्त किए होते हैं. ईश्वर की भक्ति के अंदर स्थुल भक्ति के साथ -साथ सूक्ष्म भक्ति बतलाई जाती हैं।जिसमें ज्योति और नाद की उपासना की जाती हैं जैसे बाहे संसार में प्रकाश और शब्द के बिना कोई कार्य नहीं होता. ठीक उसी प्रकार आंतरिक साधना में ज्योति और शब्द के बिना चेतना का पुर्व गमन नहीं हो सकता. अतएब भक्तों को सच्चे सदगुरु के सरन में आकर ईश्वर की भक्ति की कला सिखनी चाहिए. मानव जीवन के कल्याण में दूसरा कोई उपाय नहीं प्रवचन पंडाल मे भक्तगन झूम उठे. प्रवचन में स्वामी परमेश्वरा नन्द जी स्वामी रुदल बाबा, स्वामी सुबोदानन्द जी, प्रवचन में शामिल थे. वही प्रवचन प्रवचन सुनने आए भक्तों के लिए विशेष भंडारा का आयोजन भी किया गया. कई विशिष्ट अतिथि भी इस यज्ञ में आये.

