Home मुख्य नगर निगम के कार्यक्षेत्र का मुद्दा विधानसभा में उठा कर किसे उल्लू बना रहे हैं संजय सरावगी? Voice of Darbhanga
मुख्य - विशेष - March 20, 2017

नगर निगम के कार्यक्षेत्र का मुद्दा विधानसभा में उठा कर किसे उल्लू बना रहे हैं संजय सरावगी? Voice of Darbhanga

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दरभंगा। अभिषेक कुमार

दरभंगा के नगर विधायक संजय सरावगी का नगर की समस्याओं पर अचानक 15 साल विधायक रहने के बाद इधर दो चार दिनो से शायद अचानक पुरुषार्थ जागा है और कुछ मुद्दे जो नगर निगम के कार्यक्षेत्र में हैं, उसे नगर निगम चुनाव से ठीक पहले विधानसभा में उठा रहे हैं।

सर्वविदित है कि दरभंगा नगर निगम के मेयर गौड़ी पासवान नगर विधायक के रबड़ स्टाम्प हैं। कई मौकों पर मेयर साहब ने कहा भी है कि वे नगर विधायक की कृपा से ही मेयर बने। अब सवाल यह उठता है कि जब खुद चार बार से नगर के विधायक हैं और मेयर भी उनका ही है तो फिर कचड़ा उठाव और निगम द्वारा खरीदी मशीनों का उपयोग न होने, शहर में बंदरों का उत्पात का मामला आदि अभी विधानसभा में उठाने की क्या जरूरत पड़ी! इसका जवाब भी दबे मुह पार्टी कार्यकर्ता भी कहते हैं। हर बार निगम चुनाव में अपने चहेते उम्मीदवारों को जीता कर मेयर पद पर कब्जा विधायक के ही रबड़ स्टाम्प का होता है। पर इसबार शहर में कुछ प्रमुख युवा नेताओं के खुल कर नगर विधायक के विरोध कर देने के कारण उनकी स्थिति बहुत कमजोर हुई है। पार्टी में भी नगर विधायक का खुल कर समर्थन करने वालो का अकाल सा है। एक समुदाय विशेष मात्र जिनकी संख्या एक प्रतिशत भी नही है, उन्ही के द्वारा दरभंगा में मैथिलों की उपेक्षा कर उन्हें राजनितिक आर्थिक गुलाम बना कर रखने के मुद्दे ने लोगो के दिल से नगर विधायक को दूर किया है। इन दिनों सोशल मीडिया पर दरभंगा के तमाम प्रमुख युवा नेताओ ने खुल कर नगर विधायक की तानाशाही के विरोध में प्रतिक्रिया दी जो लगातार जारी है।

सबसे बड़ी बात, सोशल मीडिया पर चल रहे नगर विधायक के इस विरोधी तेवर को कहीं न कहीं पार्टी के कुछ वरीय नेताओं का भी मौन समर्थन प्राप्त है। इसी मौन समर्थन का नतीजा यह है कि सबकुछ देखने के वाबजूद किसी एक नेता के तरफ से कोई प्रतिक्रिया नही दी गयी है।

अतः अब शायद लोगो को उल्लू बना कर नगर निगम चुनाव में वर्चस्व बनाने का एकमात्र तरीका विधानसभा में कुछ प्रश्नों को उठाने की नौटँकी का सहारा शायद नगर विधायक को आसान लगा हो। क्योंकि इस समय प्रश्न उठाने से उनका थोड़ा नाम भी हो जायेगा और उन्हे कोई काम भी फिलहाल नही करना होगा। और फ़िलहाल अपनी और नगर निगम के निक्कमेपन का ठीकरा आसानी से राज्य सरकार पर थोप कर जनता को उल्लू बनाने की सोच को मूर्त रूप दे सकते हैं।

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