Home विशेष गाँव की महिलाओं की कबाड़ से जुगाड़ की शानदार कला हो रही उपेक्षा की शिकार।
विशेष - August 29, 2016

गाँव की महिलाओं की कबाड़ से जुगाड़ की शानदार कला हो रही उपेक्षा की शिकार।

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दरभंगा।घनश्याम झा

पूरा विश्व जहाँ पैकिंग से निकलने वाले प्लास्टिक को नष्ट करने के उपाय में लगी है वहीँ एक गाँव की महिलाएं इसके सुदुपयोग की मिसाल पेश कर रही हैं। मनीगाछी प्रखंड का बेलौर गाँव में घर घर महिलाएं एवं युवतियां इन प्लास्टिक का उपयोग चटाई बींनने में करती नज़र आ जाएंगी। गाँव की ही आशा देवी, शांति देवी, निशु कुमारी, संध्या कुमारी आदि जैसी कई परिवार की महिलायें छोटी-बड़ी हर प्रकार की डिजाइनदार ख़ूबसूरत चटाई यहां बनती है। यहां से थोक एवं खुदरे व्यपारी इसे औने पौने दामो में इनसे ले जाते हैं। इस कला पर सरकार एवं जनप्रतिनिधियों की यदि सक्रियता हो जाए तो यह कला इस क्षेत्र केलिए निश्चित रूप एक वृहद् उद्योग बन सकता है। यदि इन्हें उचित बाज़ार मिले तो प्लास्टिक के सुदुपयोग के साथ साथ कई परिवारों के जीविका का साधन भी बन सकता है।

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