Home मुख्य उर्दू परामर्शदात्री समिति में आरोपित के उपाध्यक्ष पद पर बने रहने पर उर्दू आबादी में रोष।
मुख्य - August 22, 2016

उर्दू परामर्शदात्री समिति में आरोपित के उपाध्यक्ष पद पर बने रहने पर उर्दू आबादी में रोष।

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दरभंगा: बिहार राज्य उर्दू परामर्शदात्री समिति एक ऐसी सरकारी संस्था है जो सरकार को उर्दू के विकास के लिए सुझाव और प्रस्ताव देती है और उस आलोक में सरकार उर्दू के विकास के लिए योजनाएँ बनाती हैं। पूर्व में इस समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद को राज्य की नामी गिरामी हस्तियों ने सुशोभित किया है। लेकिन इसबार ऐसा होता नहीं दिख रहा है। उपाध्यक्ष पद पर डा0 मुशताक अहमद के बने रहने से उर्दू आबादी में रोष पाया जा रहा है। इस पूरे मामले पर आज आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के क्षेत्रीय कार्यालय लालबाग एक बैठक बुलाई गई जिसकी अध्यक्षता श्री नजरे आलम ने की। बैठक को सम्बोधित करते हुए आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नजरे आलम ने बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार से आवेदन के माध्यम से डा0 मुशताक अहमद को अविलम्ब पदमुक्त करने एवं स्वतंत्र जाँच की माँग करने की बात कही। श्री आलम ने कहा कि डा0 मुशताक अहमद ल0न0मि0 विश्व विद्यालय के अंगीभूत संस्था माड़वारी काॅलेज के प्राचार्य और उससे पूर्व मिल्लत काॅलेज के प्राचार्य रहे हैं। इन दोनों संस्थाओं में उन पर वित्तीय अनियमित्ताओं एवं अपने अधिकारों का गलत उपयोग करने के आरोप लगते रहे हैं तथा आंत्रिक जाँच द्वारा उक्त आरोपों को सही समझते हुए विश्व विद्यालय ने उन्हें निलंबित कर रखा है। लेकिन आश्चर्य है कि विश्व विद्यालय से निलंबन के महीनों बाद भी वह बिहार उर्दू प्रामर्शदात्री समिति के उपाध्यक्ष के पद पर आसीन हैं जिसका धौंस भी वह विश्व विद्यालय कर्मियों, कुलपित एवं समाजिक कार्यकत्ताओं को दिखाते रहते हैं। जब्कि उन्हें तत्काल प्रभाव से उक्त पद से हटाकर किसी इमानदार व्यक्ति को उपाध्यक्ष बनाना चाहिए था। वित्तीय घोटालों में आरोपित एवं निलंबित व्यक्ति द्वारा उस पद पर बने रहने से न केवल उस संस्था की गरीमा पर आँच आ रही है बल्कि सरकार के भ्रष्टाचार समाप्त करने का दावा भी झूठा साबित हो रहा है। जानकार यह भी बताते हैं कि भले ही डा0 मुशताक अहमद उर्दू के स्काॅलर बने फिरते हैं लेकिन तथ्य यह है कि उन्हें उर्दू बोलना भी नहीं आता है और वे जब किसी कार्यक्रम में बोलते हैं तो हास्य का विषय बन जाते हैं। अंत में श्री आलम ने यह भी कि एैसे व्यक्ति का इतने महत्वपूर्ण पद पर बने रहाना किसी प्रकार उचित नहीं है और सरकार को उन्हें अविलंब उस पद से हटाकर किसी अच्छे व्यक्ति को लाना चाहिए। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो उर्दू आबादी इसके विरूध आन्दोलन करेगी। बैठक को मकसूद आलम पप्पु खान, मिर्जा नेहाल बेग, मो0 अरशुद्दीन दुलारे, विजय कुमार झा, असद रशीद नदवी, जावेद करीम जफर, हेमायुन शैख, अब्दुल कुद्दुस सागर, सरवर अली फैजी, जुबैर आलम आदि ने भी सम्बोधित किया और कहा कि सरकार डा0 मुशताक अहमद को उर्दू प्रामर्शदात्री समिति के उपाध्यक्ष पद से अविलम्ब हटाए नहीं तो उर्दू आबादी के साथ कारवाँ भी विरोध प्रदर्शण में भाग लेगा।

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