
पैसे वाले दामाद को वश में रखने की चाह ने नाबालिग को शादी से थाने तक पहुंचाया! Voice of Darbhanga

दरभंगा। अभिषेक कुमार
शुक्रवार की सुबह सिमरी थाना क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की के महिला थाना पहुँच कर जबरन शादी कर देने के कारण चार माह बाद भाग आने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मामले की खबर लिखने पर कुछ लोगों द्वारा संपर्क किये जाने पर शनिवार को वॉइस ऑफ़ दरभंगा की टीम ने ऑन स्पॉट पड़ताल की तो इसमें मामले में पुलिस पर जबरन शादी करवाने का आरोप निराधार एवं संदेहास्पद दिखा। लड़की के दादा एवं पूर्व मुखिया मधेश्वर भगत से जब संपर्क किया तो उन्होंने जो बताया एवं स्थानीय सूत्रों से बातचीत में जो कहानी सामने आयी वह कुछ अलग ही कहानी बयान करती दिखी। सभी पक्षो एवं सूत्रों के हवाले से जो कहानी सामने आयी उसके अनुसार उक्त लड़की को उम्र में चार-पांच साल बड़ा रिश्ते में उसका चाचा उसे ट्यूशन पढ़ाने, कोचिंग लाने जाने के साथ घर एवं पारिवारिक कार्यों में भी सहयोग करता था। लड़की के पिता मुंबई रहते थे और माँ के मर्जी से लड़की एवं उक्त लड़के साथ आया जाया करते थे। करीब चार पांच महीने पूर्व लड़की एकबार अपने ननिहाल गयी और लड़का उसे लाने गया था। उसी क्रम में रात के समय कंसी में उन्हें खड़े देख कर स्थानीय लोगों को शक हुआ और उन्होंने सिमरी थानाध्यक्ष को सुचना दी। थानाध्यक्ष ने वहां पहुंच कर लड़की के घर का पता लगाकर सूचना दी तो लड़की के दादा आकर ले गए और किसी प्रकार की कोई शिकायत नही रहने पर लड़के को भी छोड़ दिया। फिर लड़की के दादा एवं समाज के कुछ प्रमुख लोगों ने इज़्ज़त प्रतिष्ठा का हवाला देकर दोनों की शादी ही करवा देने का विचार किया और करीब चार महीने पहले श्यामा मंदिर में दोनों की शादी सामाजिक पहल पर करा दी गयी। लोगो ने सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर पुलिस थाना को सूचना न हो, इसके लिए गुपचुप तरीके से शादी की। इस संदर्भ में पूछने पर थानाध्यक्ष राजन कुमार ने बताया कि न ही किसी ने इस मामले में कभी कोई सुचना या आवेदन पुलिस को दिया और न ही कोई मामला दर्ज हुआ। करीब दो महीने बाद चाइल्ड लाइन कार्यकर्ता मनोहर झा के द्वारा उन्हें एसएसपी कार्यालय के आवेदन की प्राप्ति दिखाई गयी जबकि उन्हें विभाग से भी कोई पत्र आदि नही मिला था। उन्होंने जब सुचना मिलने पर भी जानकारी उस समय ली तो भी किसी ने नाबालिग के शादी आदि के संबंध में कोई शिकायत नही की। इसलिए पुलिस के पास कोई मामला दर्ज नही हुआ। और आज अचानक उन्हें पता चला है कि लड़की महिला थाना पहुँच गयी है।
हालाँकि लड़की के दादा एवं गाँव के कुछ लोगों ने भी नाम नही बताने के शर्त पर मामले को बिना मतलब तूल देने के पीछे खुल कर लड़की म माँ का हाथ बताया। उन्होंने बताया कि लड़की के पिता मुंबई रहते हैं। लड़की की माँ लड़की को मायके में रखना चाहती थी ताकि बेटी के साथ दामाद भी पहले की तरह वश में रहे और बेटी मायके में रहेगी तो दामाद खर्चा भी देता रहेगा। लड़की के दादा ने इसका विरोध किया और कहा कि कम से कम साल भर लड़की को ससुराल में रहने दो। पर लड़की की माँ को पैसा वाला दामाद अपने कब्जे में चाहिए था। इसलिए लड़की की माँ ने पूरा प्लान बनाया और अपने पति को मुंबई से बुलवाया। अब जैसा कि कहा जा रहा है कि लड़की लड़के वाले के चंगुल से मुक्त होकर भाग कर महिला थाने पहुंची तो लड़की एवं दोनों पक्षो के बुजुर्गों का बयान इसके विपरीत यह दिखाता है कि लड़की की माँ ने फोन करके अपनी बेटी को मोटिवेट किया जिसके बाद वह मायके आयी और मायके आकर पूरा प्लान बना कर अपने पिता के साथ लहेरियासराय के साथ वहां से निकली जिसके बाद पूरा बबाल हुआ।
घटना और बाल विवाह की सच्चाई तो पूरी जांच के बाद ही सामने आएगा। पर अभीतक जो सभी पक्षो के हवाले से कहानी बनी है उसके अनुसार विवाह कराने से लेकर महिला थाना तक पहुंचने तक के जड़ में लड़की के माँ का दामाद को वश में रखने की मंशा अहम दिख रही है।

