
शहीद नरेश को राजकीय सम्मान के साथ दी गयी अंतिम विदाई में उमड़ पड़ा जनसैलाब। Voice of Darbhanga

दरभंगा : छत्तीगढ़ के सुकमा में शहीद हुए आपीएफ 74वीं बटालियन के जवान नरेश यादव का शव जैसे ही दरभंगा के पोलो मैदान के पास पहुंचा, लोगों की भीड़ जवान का आखिरी दर्शन करने के लिए बेताब हो गई. लोगों ने जमकर घर का बेटा कैसा हो नरेश यादव जैसा हो कि गुंजयमान हो गया. नेहरू स्टेडिय से लेकर 6 किलोमीटर दूर उनके गांव अहिला तक हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. उनके पार्थिव शरीर पर बिहार सरकार की ओर से खाद्य एवं उपभोगता संरक्षण मंत्री मदन सहनी ने पुष्पांजलि अर्पित की. पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए
जवान के गांव अहिला पहुंचने वालों में जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह, वरीय पुलिस अधीक्षक सत्यवीर सिंह समेत कई पुलिस अधिकारी शामिल थे. जिनलोगों ने जवान के शव पर पुष्पांजलि अर्पित की. शहीद का शव सीआरपीएफ के वाहन के द्वारा यहां लाया गया था. जैसे ही शहीद का शव उनके गांव पहुंचा, परिवार वालो का सब्र का बान टूट गया. काफी देर धैर्य बनाकर रखने वाले उनके पिता के आंखों से भी आंसू छलक गई. देश के लिए बेटे की कुर्बानी का जहां उन्हें गर्व था, लेकिन अपनों के बीच ही लड़ाई में हुई बेटे की मौत उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था. शहीद का बड़ा बेटा भी फूट-फूट कर रोने लगा. बेटी सुमित भी शहीद की शव को देख कर बेहोश हो गई. जिसे लोगों ने होश में लाने की कोशिश की. पूरा परिवार बस एक ही रट लगा रहा था कि आज ही के दिन शहीद ने घर लौटने की बात कही थी. घर तो लौटे, लेकिन फिर कभी नहीं मिलने के साथ वादा तो पूरा किया, लेकिन अब वह दोबारा घर वह लौट कर नहीं आएंगे. सीआरपीएफ के जवानों ने उन्हें गार्ड आॅफ आॅनर से नवाजा और सलामी दी. वहीं हजारों लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित किया. उनके पार्थिव शरीर को उनके बड़े पुत्र अमीत कुमार ने मुखाग्नि दी. पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनकों अंतिम विदाई दी गई. गांव के कई लोगों ने रोते हुए कहा कि देश से नक्सलियों की सफाई किए जाने को लेकर केन्द्र सरकार को कदम जल्द उठना चाहिए. वहीं लोगों ने यह प्रण लिया कि शहीद की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी. गांव के कई घरों से सीआरपीएफ में युवा बहाल होंगे और इसका बदला लेंगे.

