
कमला बलान नदी के उफान से घनश्यामपुर प्रखंड में बाढ़ की मार, आठ गांव टापू बने।
दरभंगा: जिले के घनश्यामपुर प्रखंड में कमला बलान नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के कारण नदी उफान पर है, जिससे तटवर्ती गांवों में पानी का दबाव तेजी से बढ़ा और रविवार शाम से सोमवार तक आठ गांव पूरी तरह टापू में बदल गए।

सोमवार की सुबह से बाऊर, नवटोलिया, बैजनाथपुर, कनकी मुसहरी, भरसाहा, कैथाही, रसियारी पुनर्वास टोला, लगमा मुसहरी और जमरी डीह टोला जैसे निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों, आंगनों और गलियों में घुसने लगा। कई परिवार ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए, जबकि कुछ लोग अभी भी अपने घरों में डटे हुए हैं। प्रशासन लगातार चेतावनी जारी कर रहा है कि लोग तत्काल सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित हो जाएं।

अंचलाधिकारी नीलोफर मलिका ने रविवार को ही बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की थी, लेकिन अधिकांश ग्रामीण घर छोड़ने को तैयार नहीं थे। सोमवार को पानी बढ़ने पर प्रशासनिक टीमें नावों के माध्यम से गांवों में पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया।

अंचलाधिकारी कार्यालय के अनुसार, अब तक 14 नावें राहत कार्यों में लगाई गई हैं, जिनकी संख्या जरूरत पड़ने पर बढ़ाई जाएगी।नदी के उफान से प्रखंड का सड़क संपर्क लगभग ठप हो गया है।

बाऊर-घनश्यामपुर प्रधानमंत्री सड़क पर एक से दो फीट तक पानी बह रहा है, जिससे ग्रामीण नाव या अस्थायी बेड़ों का सहारा ले रहे हैं। आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है, जबकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में पेयजल, पशु चारा, खाद्यान्न, ईंधन और दवाओं की भारी कमी हो गई है। लोग कमला बांध के पूर्वी तटबंध पर शरण लेकर अस्थायी आश्रय बना रहे हैं, जहां महिलाएं और बच्चे ऊंचे स्थानों पर चूल्हा जलाकर गुजारा कर रहे हैं।बाढ़ ने क्षेत्र के कई विद्यालयों को भी प्रभावित किया है।
मध्य विद्यालय बाऊर कन्या, मध्य विद्यालय नवटोलिया, मध्य विद्यालय रसियारी और प्राथमिक विद्यालय कनकी मुसहरी में पानी भर गया है, जिससे पढ़ाई और मिड-डे मील योजना पूरी तरह ठप हो गई। अभिभावक बच्चों की सुरक्षा और भविष्य की चिंता में डूबे हैं।
किसानों को इस बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। लगातार बारिश और नदी के उफान से धान, मक्का, मरुआ, केला, अरहर और सब्जियों की फसलें कई एकड़ में बर्बाद हो गईं। किसानों का कहना है कि यदि जलस्तर शीघ्र नहीं घटा तो रबी सीजन की तैयारी भी प्रभावित हो जाएगी।
अंचलाधिकारी नीलोफर मलिका ने सोमवार को कमला बांध का निरीक्षण किया और बताया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को प्राथमिक सहायता के रूप में 100 तिरपाल वितरित किए गए हैं। जलस्तर बढ़ने पर सामुदायिक किचन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “कमला नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सभी धावादलों और राजस्व कर्मियों को सतर्क किया गया है। बांधों पर निगरानी रखी जा रही है, कमजोर स्थानों पर मरम्मत जारी है और विभागीय अधिकारी कैंप कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।”कमला नदी के पूर्वी और पश्चिमी तटबंधों पर दबाव बढ़ रहा है। सिंचाई विभाग की टीमें कमजोर स्थलों की पहचान कर बांध सुदृढ़ीकरण का कार्य युद्ध स्तर पर कर रही हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि लापरवाही से तटबंध टूटने का खतरा है।
स्थानीय ग्रामीण रामविनोद यादव, चंदन यादव और करन राम ने शिकायत की कि हर साल बाढ़ से तबाही होती है, लेकिन प्रशासन केवल राहत सामग्री बांटकर खानापूर्ति करता है। उन्होंने सरकार से स्थायी बांध सुदृढ़ीकरण और पुनर्वास योजना की मांग की है।प्रशासन ने जनता से अपील की है कि नदी किनारे न जाएं और ऊंचे स्थानों पर शरण लें। रात में जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। आपात स्थिति में राजस्वकर्मी, सीओ कार्यालय या 1077 कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

