Home मुख्य जमीनी विवाद में गयी पतोर ओपी के पुलिस पर हमले से पुलिस ने खुद ही कानून के राज पर सवाल उठा दिया!
मुख्य - July 29, 2016

जमीनी विवाद में गयी पतोर ओपी के पुलिस पर हमले से पुलिस ने खुद ही कानून के राज पर सवाल उठा दिया!

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दरभंगा: शुक्रवार को एक जमीनी विवाद में गये पतोर ओपी के थानाध्यक्ष पवन कुमार सहित तीन पुलिस वाले प्रतिपक्ष के हमले में घायल बताये जाते हैं। साथ ही साथ पुलिस का आरोप है कि हमला कर हथियार छिनने का प्रयास किया गया।आरोप है कि पुरुषों व महिलाओं ने मिलकर उसपर हमला कर दिया। तीन लोगों रामजीवन यादव, रघुनाथ यादव व अमरनाथ यादव को पुलिस थाने ले आई है। इनके अलावा दो महिलाओं शोभा देवी, लरुवती देवी और अन्य लोगों पर नामजद प्राथमिकी (298/16) दर्ज की गई है। हमले में पतोर ओपी प्रभारी पवन कुमार के साथ उनके तीन जवान होमगार्ड के रवि कुमार, ललन कुमार, बीएमपी के शिवलाल तांती को चोटें आई हैं। बहादुरपुर पीएचसी में तीनों का इलाज हुआ। इस बीच भाकपा-माले के प्रखंड सचिव अभिषेक कुमार ने हमले की बात को मनगढंत करार दिया और पुलिस पर एकतरफा दमनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाया। इस सिलसिले में शनिवार को माले नेता ने पतोर ओपी का घेराव करने का ऐलान किया है। माले नेता ने कहा कि केवाला की जमीन है। उसकी रसीद व जमाबंदी रामजीवन के परिवार के पास है। पुलिस दूसरे पक्ष के मेल में आकर जबरन उसे गिरफ्तार कर ले गई है। उधर, पुलिस का कहना है कि रघुनाथ के बेटे को जरूरी पूछताछ के लिए जीप से थाने लाया जा रहा था। उसे उतारने के लिए रामजीवन ने पुलिसकर्मी अमर कुमार साहू की एक राइफल छीन ली। काफी मशक्कतों से अमर ने अपना राइफल हासिल किया। पुलिस ने बताया कि प्रमोद दास, वसतपुर के अनिल यादव व बबलू लालदेव तीनों लोगों का उसमा मठ में एक ही जगह घर है। उनके घर के सामने ही रामजीवन यादव और उसका परिवार रहता है। इन लोगों के बीच पूर्व में इस विवादास्पद जमीन पर चापाकल गाड़ने को लेकर विवाद हुआ था। बहादुरपुर सीओ दिलीप कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस जमीन को सरकारी बताकर धारा-144 लगा दिया था। इस जमीन पर रामजीवन और उसका बेटा रघुनाथ यादव व अमरनाथ यादव आदि मिलकर बाउंड्री खड़ा कर रहे थे। इसकी सूचना पाकर पुलिस वहां पहुंची थी।

बहरहाल, यदि पुलिस का आरोप सत्य भी है तो क्या कानून के राज पर खुद पुलिस द्वारा ही सवाल नही उठाया जा रहा? क्या सारी महिलाये और पुरुष वहां पेशेवर मुजरिम थे जो सुनियोजित ढंग से हमला किये? इसका जवाब तो न में ही होगा शायद। पर एक बड़ा सवाल पुलिस के आलाधिकारियों केलिए भी रह गया कि पुलिस को कारवाई में जनसहयोग क्यों नही मिल पाता और असामाजिक तत्वों में पुलिस का डर क्यों नही है!

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