
दरभंगा में जल संकट से हाहाकार, सूखे ट्यूबवेलों से बिगड़े हालात, 9 अगस्त को जनांदोलन की घोषणा।
दरभंगा: कंसी समेत जिले के विभिन्न गांवों में जल संकट गहराता जा रहा है। 95 प्रतिशत से अधिक ट्यूबवेल सूख चुके हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। लोगों को शौच, स्नान, कपड़े धोने और पीने के पानी के लिए भी जूझना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि इंसानी जिंदगी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल संकट दूर करने में सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर वामपंथी दलों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सीपीएम जिला सचिव अविनाश कुमार ठाकुर मंटू और सचिव मंडल सदस्य दिलीप भगत सहित अन्य नेताओं ने सरकार की नल-जल योजना और जल मीनारों की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।

नेताओं ने कहा कि वर्षों से नलजल एवं जल मीनारें बंद पड़ी हैं। अब यह योजना ग्राम पंचायत के बजाय लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के अधीन है, लेकिन विभाग की उदासीनता के कारण जनता त्राहिमाम कर रही है। नेताओं ने मांग की है कि सभी बंद नलजल योजनाओं और जल मीनारों को अविलंब चालू किया जाए और दलित, महादलित, अल्पसंख्यक, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग की बस्तियों, चौक-चौराहों और विद्यालय परिसरों में समरसेबल लगाने की तत्काल व्यवस्था हो।

बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार जल संकट के समाधान के बजाय मतदाता गहन पुनरीक्षण कार्य के नाम पर गरीब, दलित, प्रवासी एवं कमजोर वर्गों का नाम मतदाता सूची से काट कर लोकतंत्र की हत्या कर रही है, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश है।

इधर, किसानों की परेशानी और भी बढ़ गई है। बिचड़ा सूख गया है और धान की खेती पर गंभीर असर पड़ रहा है। कृषि कार्य पूरी तरह चौपट हो गया है।
इन सभी मुद्दों को लेकर वामपंथी दलों ने 9 अगस्त, क्रांति दिवस के अवसर पर दरभंगा जिला मुख्यालय पर जनांदोलन की घोषणा की है। इसकी तैयारियों को लेकर गांवों और मुहल्लों में बैठकों का दौर तेज हो गया है।

