Home Featured दिल से दिल तक: Gen Z की अनसुनी पीड़ा बयां करती वैभव की नई किताब।

दिल से दिल तक: Gen Z की अनसुनी पीड़ा बयां करती वैभव की नई किताब।

दरभंगा: डिजिटल दुनिया की चमक में खोती नई पीढ़ी के अकेलेपन और भावनात्मक उलझनों को आवाज देती है युवा लेखक वैभव कुमार झा की दूसरी किताब ‘दिल से दिल तक: अनसुनी दास्तानें’। मात्र 16 साल के इस साहित्यकार ने Gen Z के मन की गहराइयों को शब्द दिए हैं, जो मोबाइल और सोशल मीडिया के जाल में फंसे युवाओं की अनकही कहानियां बयां करती है।

Gen Z के लिए संदेश:

भावनाओं को दबाएं नहीं, समझेंकिताब युवाओं को बताती है कि भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें व्यक्त करना जरूरी है। अकेलापन असफलता नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का संकेत हो सकता है। आभासी दुनिया से बाहर निकलकर वास्तविक रिश्तों को महत्व दें और खुद को स्वीकार करें—यही जीवन की सबसे बड़ी जीत है। यह रचना आत्मविश्वास, सम्मान और मानसिक संतुलन की प्रेरणा देती है।

समाज के लिए चेतावनी:

सुनो युवाओं की आवाज यह किताब माता-पिता, शिक्षकों और समाज को जगाती है कि युवाओं की परेशानियां सिर्फ पढ़ाई या नौकरी तक सीमित नहीं। भावनात्मक दुनिया को समझना जरूरी है। इससे संवाद मजबूत होगा, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ेगी और समाज संवेदनशील बनेगा। लेखक चेताते हैं—युवाओं की चुप्पी न सुनी गई तो आने वाला समय ‘अनसुनी दास्तानों’ से भर जाएगा।

वैभव झा: 16 साल में राष्ट्रीय पहचान

दरभंगा जिले के देकुली गांव के वैभव के पिता सुमन कुमार झा और मां नीतू देवी हैं। वे बिहार के सबसे कम उम्र के लेखक, फैशन डिजाइनर और मॉडल हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ लेखक-मॉडल चुना। मगध महोत्सव में विशेष सम्मान और बिहार फैशन स्टेज पर मिस यूनिवर्स रस सिन्हा व संभावी झा ने राष्ट्रीय पुरस्कार दिया।

Share