Home Featured मलेशिया में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. राजनाथ झा होंगे मुख्य वक्ता।
Featured - मुख्य - July 23, 2025

मलेशिया में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. राजनाथ झा होंगे मुख्य वक्ता।

दरभंगा: प्राच्य विद्या के प्रतिष्ठित केंद्र कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि यहां के पूर्व छात्र एवं शोधार्थी रहे ख्यातिप्राप्त ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा आगामी 29 जुलाई से 2 अगस्त 2025 तक मलेशिया में आयोजित “श्री सुब्रमण्यम एस्ट्रोलॉजिकल एंड स्पिरिचुअल कन्वोकेशन” में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करेंगे।

Advertisement

अंतरराष्ट्रीय वैदिक एस्ट्रोलॉजी फेडरेशन (अमेरिका) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में दुनियाभर के विख्यात ज्योतिषविद् एवं आध्यात्मिक मनीषी भाग लेंगे। इस वैश्विक मंच पर डॉ. झा “भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं के वैदिक पूर्वानुमान” विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। यह विषय न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय वैदिक परंपरा की गहराई और प्रासंगिकता को भी वैश्विक पटल पर रेखांकित करेगा।

Advertisement

सम्मेलन के दौरान डॉ. झा ज्योतिष शास्त्र में निहित लौकिक एवं पारलौकिक चेतना पर भी एक विशिष्ट व्याख्यान देंगे। इस अवसर से भारत की वैदिक वैज्ञानिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना है। संस्कृत विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी निशिकांत प्रसाद सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. झा वर्तमान में ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान, पटना के निदेशक हैं। वे पूर्व में भी कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत, विशेषकर बिहार की समृद्ध ज्योतिषीय परंपरा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

Advertisement

मधुबनी जिले के दीप गांव निवासी डॉ. झा, प्रसिद्ध विद्वान पंडित केदारनाथ झा के पुत्र हैं। उन्होंने वर्ष 1998 में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के गणित-ज्योतिष विभाग से आचार्य परीक्षा में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही उन्होंने शलाका परीक्षा में भी शीर्ष स्थान हासिल किया और यहीं से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

Advertisement

डॉ. झा के निर्देशन में संस्थान में भूकंप पूर्वानुमान, कैंसर, नेत्र रोग, मानसिक रोग एवं स्वास्थ्य-ज्योतिष,जैसे जटिल विषयों पर शोध कार्य भी जारी हैं। उनका यह अंतरराष्ट्रीय योगदान न केवल विश्वविद्यालय बल्कि सम्पूर्ण मिथिला और बिहार के लिए गर्वका विषय है।

Share