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May 26, 2019

नए युग में छात्रों की अकादमी क्षमता का निर्माण समय की मांग है:प्रो०सिंह

देखिये समारोह का वीडियो भी।

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दरभंगा कार्यालय: सदी का दूसरा दशक समापन की ओर है।यह शताब्दी वास्तव में ज्ञान की शताब्दी है।इस ज्ञान-केन्द्रित समाज में केवल विश्वविद्यालय ही नहीं,बल्कि सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से स्वाभाविक अपेक्षा की जाती है कि वह अपने गुणात्मक क्रियाकलापों, खासकर शिक्षण एवं शोध के लिए वैश्विक समाज को अपना सर्वोत्तम अंशदान दें। उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रो एस के सिंह ने कहा। प्रो सिंह स्थानीय सी एम कॉलेज, दरभंगा में प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस नए युग में छात्रों की अकादमी क्षमता का निर्माण समय की मांग है। इसलिए यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए कि वैश्वीकरण के आविर्भाव और शनैः शनैः उसकी परिपक्वता के कालखंड में हमारा भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान आज बैश्विक प्रणाली का एक अभिन्न अंग बने। प्रो सिंह ने कहा कि सी एम कॉलेज,दरभंगा की पहचान इसकी अकादमी प्रतिष्ठा से रही है।80 वर्षों से अधिक प्राचीन इस कॉलेज की स्थापना 1938 में हुई थी।इस कॉलेज ने मिथिलांचल में आधुनिक शिक्षा का एक नया युग शुरू किया।उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के स्नातकों को वैश्विक रूप से योग्य व्यक्ति से स्वस्थ प्रतियोगिता करनी होती है।ऐसे समय में हमें अपने छात्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के अकादमिक गुणों का विकास करना होता है।मुझे आशा ही नहीं,बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आप समस्त स्नातकों का इस विख्यात कॉलेज में अपने प्रतीक में उद्घोषित दर्शन के अनुरूप पूरे मनोयोग से शैक्षणिक व्यक्तित्व का निर्माण कर अपनी अकादमी क्षमता का विकास किया है। परिणामस्वरूप आज आप नियोजन की योग्यता प्राप्त कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि हमें प्रसन्नता है कि सी एम कॉलेज ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सफलता का परचम लहराया है तथा वर्तमान में भी छात्रों के लिए प्राथमिकता रखता है।उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह का आयोजन का मूल उद्देश्य छात्रों की प्रतिभा,क्षमता और उपलब्धियों को सार्वजनिक महत्व प्रदान कर उन्हें सामाजिक व शैक्षणिक रूप से प्रतिष्ठित करना है।

विश्वविद्यालय कुलगीत के समय खड़े शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं

दीक्षांत समारोह के मुख्य वक्ता इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस,नई दिल्ली के निदेशक प्रो आश नारायण राय ने कहा कि शिक्षा का अर्थ समाज में समता का प्रकाश फैलाना है।मूल ज्ञान वह है जो व्यक्ति के अंदर के अंधकार को मिटाता है और दूसरों के लिए अवसर का मार्ग प्रशस्त करता है। प्रो राय ने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि आज जिस शिक्षण संस्थान में दीक्षांत भाषण के लिए खड़ा हूं,जहां से मैंने शिक्षा ग्रहण किया।यह अवसर मेरे जीवन का सुखद पहलू है।आज वैश्वीकरण के दौर में आधुनिक शिक्षा के मापदंड को पूरा करना आवश्यक है।यदि हमारे छात्र आधुनिक तकनीक का लाभ उठाएंगे तो उनके ज्ञान में न केवल संवर्धन होगा,बल्कि वे जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफल होंगे।शिक्षा सबसे सशक्त माध्यम है,जिसके द्वारा दुनिया को बदला जा सकता है। 21वीं सदी हमसे काफी उम्मीद रखता है। असफलता से छात्र न घबराए, क्योंकि हर सफल व्यक्ति कभी न कभी जीवन में जरूर असफल होता है।

डॉ आर एन चौरसिया के साथ गोल्ड मेडल प्राप्त छात्र-छात्राएं.

विश्वविद्यालय के प्रति- कुलपति प्रो जय गोपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा का विशेष महत्व रहा है। गुरु की गरिमा को वैदिक ऋचाओं तथा उपनिषदों के सूक्तों में विद्या के अमृत तत्व को स्पष्ट किया गया है। विद्या के समान कोई दूसरा नेत्र नहीं होता,क्योंकि विद्या अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है। दीक्षांत समारोह विद्या का महापर्व होता है।इस दिन शिष्य को गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।गुरु अपने ह्रदय के अमृत से शिष्यों के पथ को प्रशस्त करने हेतु सिद्ध मंत्रों से अभिषेक करते हैं।उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के बल पर ही हम समाज और राष्ट्र को विकसित कर सकते हैं।
इस अवसर पर कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्र स्थानीय विधायक संजय सरावगी को भी सम्मानित किया गया।श्री सरावगी ने अपने सम्मान के लिए कॉलेज परिवार का आभार व्यक्त किया और दीक्षांत समारोह के आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही छात्रों का भविष्य बदल सकता है और समाज की तस्वीर भी बदल सकती है। हम आशा करते हैं कि दीक्षांत समारोह का संदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर अग्रसर होगा।
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डा मुश्ताक अहमद ने इस अवसर पर अपने वार्षिक प्रतिवेदन में कहा कि 26 मई, 2019 सी एम कॉलेज के लिए ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। महाविद्यालय के इतिहास में एक जीवंत,जागृत तथा सारस्वत अध्याय जुड़ गया है।दीक्षांत समारोह की यह शुरुआत है।हम लोगों ने एक नई चेतना पैदा हुई है।यह दीक्षांत समारोह का पुनर्नवा का उत्सव है। महाविद्यालय में एक नया संस्कार तथा नई उर्जा उत्पन्न हुई है। दीक्षांत समारोह का तात्पर्य दीक्षा के अंत से नहीं है,अपितु एक मंजिल तक पहुंच कर दूसरी नई मंजिल की ओर अग्रसर होना है।सी एम कॉलेज छात्र- छात्राओं की शिक्षा तथा व्यक्तित्व के प्रति समर्पित है। महाविद्यालय का मूल केंद्र वर्ग कक्षा से जुड़ा हुआ है, जिसमें राष्ट्र का निर्माण होता है।हमारा मिशन छात्र-छात्राओं में नेतृत्व क्षमता को विकसित करना है। साथ ही उनके संस्कार में नैतिकता को विकसित करने के लक्ष्य में हम जुटे हुए हैं। उनके जीवन एवं व्यक्तित्व के निर्माण की प्रयोगशाला के रूप में 8 दशकों से अपने लक्ष्य के प्रति निष्ठावान हैं। छात्र-छात्राओं में व्यक्तिगत जिम्मेदारी तथा नागरिक दायित्व के प्रति गंभीर चेतना विकसित करने हेतु हम प्रयत्नशील हैं।हम चाहते हैं कि छात्र-छात्राओं में तथा हमारे परिवार के सभी मान्य सदस्यों में मौलिक अधिकार के परिज्ञान के साथ मौलिक कर्तव्य की चेतना भी विकसित हो।हाल के वर्षों में सी एम कॉलेज गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को नया आयाम देने के लिए ज्ञान-समाज(नॉलेज सोसायटी) तथा ज्ञान अर्थव्यवस्था से जुड़ता जा रहा है। संचार तकनीकी, स्मार्ट क्लास,वाई-फाई सुविधा तथा अन्य अनेक आधुनिकतम शिक्षण तकनीक का उपयोग महाविद्यालय में किया जा रहा है।शिक्षा में डिजिटल पहल हेतु विश्वविद्यालय स्तर पर चयनित 4 महाविद्यालयों में एक सी एम कॉलेज भी है।
सी एम कॉलेज परिवार का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को मात्र डिग्री देना या रोजगार पाने तक सीमित नहीं है,बल्कि एक अच्छे इंसान का निर्माण करना है,क्योंकि समाज में सबसे बड़ी आवश्यकता मानवीय मूल्यों की रक्षा है। कालजयी कवि मिर्जा गालिब ने कहा है-
बस के दुश्वार है, हर काम का आसां होना आदमी को भी मयसर नहीं,इंसान होना।लेकिन हमारा सफर अभी जारी है,हम बेहतर से बेहतरीन की तलाश में हैं, हमारे सामने पूरा विश्व है और हम आकाश में भी अपनी रोशनी देखना चाहते हैं। अर्थात्

सितारों से आगे जहां और भी हैं।अभी इश्क के इम्तिहां और भी हैं।
डा अहमद ने मिथिला के साहित्यिक,सांस्कृतिक एवं बौद्धिक चेतनाओं के इतिहास पर प्रकाश डाला और सी एम कॉलेज की स्थापना से लेकर आज तक के शिक्षा के मशाल को जलाए रखने में कॉलेज की भूमिका पर प्रकाश डाला।प्रारंभ में कॉलेज की ओर से प्रधानाचार्य डॉ अहमद ने मुख्य अतिथि प्रोफेसर एस के सिंह,कुलपति का सम्मान चादर एवं मोमेंटो से किया। बुके के स्थान पर सभी अतिथियों को जीवंत पौधा देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कुल 246 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की गई,उनमें 19 को गोल्ड मेडल दिए गए। मंच का संचालन प्रो इंदिरा झा ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में कर्नल निशिथ कुमार राय,कुलसचिव तथा परीक्षा नियंत्रक डॉ अशोक कुमार मेहता भी शामिल हुए। दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन छात्र-छात्राओं के उल्लास में चार चांद लगाने वाला था। डिग्री पाने वाले छात्रों के चेहरे पर एक उत्साह पूर्ण चमक दिखाई दे रही थी। विशेषकर गोल्ड मेडल पाने वाले छात्रों का उत्साह देखते ही बनता था।इस दीक्षांत समारोह को ऐतिहासिक बनाने में कॉलेज परिवार ने जो अथक परिश्रम किया और अतिथि सम्मान में तत्पर रहे,वह भी सराहनीय है। इस अवसर पर एनएसएस के स्वयंसेवक तथा एनसीसी के कैडेट ने सराहनीय कार्य कर समारोह को सफल बनाया।

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