Home Featured हाजरी व डीजल के बाद अब नगर निगम में शौचालय घोटाला को लेकर दर्जन भर पार्षदों ने खोला मोर्चा।
August 1, 2019

हाजरी व डीजल के बाद अब नगर निगम में शौचालय घोटाला को लेकर दर्जन भर पार्षदों ने खोला मोर्चा।

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दरभंगा: दरभंगा नगर निगम अक्सर अपने कारगुजारियों को लेकर विवादों में रहता है। एकबार फिर दरभंगा नगर निगम में डीजल व हाजिरी घोटाला के बाद निगम के राजस्व का नुकसान कर बंदरबांट का मामला तूल पकड़ने लगा है। शौचालय बंदोबस्ती की राशि में 27 लाख की छूट वाले मामले को लेकर पक्ष व विपक्ष के वार्ड पार्षद आमने-सामने हैं। विपक्ष के पार्षद महापौर बैजयंती देवी खेड़िया, तत्कालीन नगर आयुक्त डॉ. रविद्र नाथ व सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों पर नियम के विपरीत रामाशंकर सिंह की संस्था वेलफेयर ट्रस्ट को 27 लाख की राशि का छूट देकर बंदरबांट करने का आरोप लगा रहा है। वहीं पक्ष के पार्षद इसे नियम के तहत बता रहे हैं। मामले को लेकर गुरुवार को 13 पार्षद व कई पूर्व पार्षदों की ओर से प्रमंडलीय आयुक्त मयंक बरबड़े को ज्ञापन सौंपते हुए जांच की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने वाले पार्षदों का कहना है कि तीन वर्ष पूर्व 2016-17 से लेकर 2018-19 तक 3 वित्तीय वर्ष के लिए वेलफेयर ट्रस्ट को 9 शौचालय की बंदोबस्ती 66 लाख 585 रुपये में दी गई थी। बाद में संवेदक की ओर से 3 शौचालय की स्थिति को जर्जर बताते तीन वर्ष के लिए 27 लाख 19 हजार 8 रुपये के छूट का आवेदन दिया गया। सदस्यों का कहना है कि 29 मई 2018 को स्थायी समिति की बैठक में छूट देने के इस एजेंडा को पारित करा दिया गया। जबकि नगर विकास व आवास विभाग ने 22 मई 2018 के अपने पत्र में छूट देना नियम के विपरीत बताया था। वहीं 6 जुलाई को 2019 को बोर्ड की बैठक में इसके सहित अन्य विषयों को समझने के लिए बैठक को आगे कराने की मांग की। साथ ही बैठक में भाग नहीं लिया। लेकिन, सदस्यों की मांग को दरकिनार कर उस दिन की ही बैठक में छूट देने के निर्णय को दिखाते हुए संवेदक को पत्र दे दिया गया। आश्चर्यजनक पहलु यह है कि बैठक का प्रस्ताव की प्रति निकला भी नहीं और संवेदक को छूट का पत्र निर्गत कर दिया गया है। सदस्यों का आरोप है कि संवेदक को इसके अलावा 12 लाख की छूट देने की तैयारी की जा रही है। इधर महापौर बैजयंती देवी खेड़िया का कहना है कि छूट देने का आवेदन तत्कालीन महापौर गौड़ी पासवान के समय का है। उसी दौरान सहमति दी गई थी। वर्तमान में स्थायी समिति की ओर से जो छूट दी गई है वह नगर विकास व आवास विभाग के निर्देशानुसार नियम के तहत दी गई है। विभाग से पत्र मिलने के बाद स्थायी समिति से पारित होने के बाद बोर्ड की बैठक से भी यह प्रस्ताव पास हुआ था।

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