Home Featured जल-जीवन हरियाली अभियान का शुभारंभ, डीएम ने पर्यावरण संरक्षण का दिलाया संकल्प।
2 weeks ago

जल-जीवन हरियाली अभियान का शुभारंभ, डीएम ने पर्यावरण संरक्षण का दिलाया संकल्प।

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दरभंगा: बिहार पृथ्वी दिवस के अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बापू सभागार, पटना से जल जीवन हरियाली कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का विभिन्न टीवी चैनलों पर सीधा प्रसारण किया गया। इसके अलावा इस कार्यक्रम का वेबकास्टिंग के जरिये भी सीधा प्रसारण देखा गया।

दरभंगा जिला मुख्यालय में प्रशासन द्वारा स्थानीय डीएमसीएच का प्रेक्षागृह “जल जीवन हरियाली अभियान’’ का गवाह बना।
मुख्यमंत्री ने ग्लोबल वार्मिग एवं ग्रीन हाउस गैसेज का उत्सर्जन के चलते मानव जीवन के अस्तित्व पर बढ़ते संकट के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिग के चलते जलवायु में परिवर्त्तन हो रहा है। वर्षापात निरंतर कम होती जा रही है। उन्होंने वर्षापात का आँकड़ा प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले 30 वर्षों का औसत वर्षापात 1027 मि.मी. है, लेकिन पिछले 13 वर्षों का औसत घटकर 900 मि.मी. रह गया है। वर्ष 2018 में तो वर्षापात खतरनाक तरीके से घटकर 771 मि.मी. हो गयी है। जिसके चलते बिहार के सभी जिलों में भीषण जल संकट का सामना करना पड़ा। वर्षापात कम होने से सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने कहा कि यह सब जलवायु परिवर्त्तन का दुष्प्रभाव है। एक तो वर्षापात की कमी एवं दूसरे वर्षा जल का संरक्षण नहीं हो पाने की चलते दोहरी मार पड़ रही है। वर्षा का पानी ठहर नहीं रहा है। सावन व भादो के महीने में धूल उड़ रही है। इसके लिए विशाल जन समुदाय को जागरूक होने की जरूरत है, पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा तभी जीवन सुरक्षित रहेगा।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन के लिए न्यूनतम एक तिहाई भू-भाग में पेड़/पौधों का होना जरूरी है, अभी बिहार राज्य में 15 प्रतिशत वन क्षेत्र है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। अधिक से अधिक पेड़ लगाने से ही हरियाली आयेगी। इससे वर्षापात की मात्रा भी सामान्य होगी। वर्षा जल की बर्बादी भी रूकेगी। वर्षा जल का संचयन करके ही भू-जलस्तर को नीचे गिरने से रोका जा सकता है। इसलिए सबसे पहले सभी सरकारी बिल्डिगों में वर्षा जल संचयन हेतु स्ट्रक्चर लगाने का कार्य शुरू किया गया है। सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिग स्ट्रक्चर संस्थापित होने पर निजी भवनों में भी वाटर हार्वेस्टिग स्ट्रक्चर लगाने के लिए प्रेरित किया जायेगा। इसके पूर्व डीएमसीएच प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में दरभंगा के जिलाधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने विचार रखे।
जिलाधिकारी डॉ.त्यागराजन एसएम ने कहा कि इसी माह 17 तारीख को दरभंगा जिला क्षेत्र में 01 लाख पौधारोपण करने का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष गर्मी के मौसम में दरभंगा नगर सहित कई अंचलों में भीषण जल संकट की समस्या उत्पन्न हुई थी। मिथिला में जल संकट ने आगे एक बड़े खतरे का संकेत दिया है। इसलिए मिथिला में जल संकट की स्थिति का मुआयना करने के बाद ही राज्य में ‘‘जल जीवन हरियाली अभियान’’ की परिकल्पना की गई और इस दिशा में कार्य प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि दरभंगा से प्राकृतिक जल श्रोतों का विशाल भंडार मौजूद है, लेकिन सभी जल श्रोतों को अतिक्रमण कर लिया गया है।
इसलिए प्रशासन द्वारा सभी सरकारी पोखर/तालाब/आहर/पैन को चिन्ह्ति कर इसके उड़ाहीकरण एवं अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि 321आहर/पैन एवं 202 तालाब की उड़ाही की गई है। 37 चेकडैम निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 30 का कार्य पूरा हो गया है।
उन्होंने कहा कि वर्षा जल संचयन हेतु सभी सरकारी भवनों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक पंचायत के 05 भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर लगाया जायेगा। साथ ही नल-जल योजना के तहत लगाये गये नल के पास एवं चापाकल, कुँआ आदि के पास के पास अव्यवहृत पानी को रोकने हेतु सोख्ता का निर्माण किया जायेगा। इन सब कार्यों से भू-गर्भ जल रिचार्ज होगा। उन्होंने पानी बर्बादी रोकने एवं अधिक से अधिक पेड़ लगाने का अपील किया।
“जल जीवन हरियाली अभियान’’ के अवसर पर जिला पदाधिकारी ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को पर्यावरण संतुलन के लिए सदैव सचेष्ट रहने, पौधारोपण करने, प्राकृतिक श्रोतों के दूषित नही करने, पानी का दुरूपयोग नही करने, प्लास्टिक का उपयोग नही करने एवं पशु-पक्षियों के प्रति दया-भाव रखने का संकल्प दिलाया।
इस कार्यक्रम में उपस्थित जाले विधायक जीवेश मिश्रा ने बताया कि दरभंगा के विशाल प्राकृतिक जल श्रोतों के संरक्षण एवं संबर्द्धन एवं पर्यावरण संतुलन हेतु अधिकाधिक पेड़ लगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम जितना अधिक पेड़ लगायेंगे और उसकी सुरक्षा करेंगे तो उतना ही जीवन संरक्षित होगा।
हायाघाट के विधायक अमरनाथ गामी, महापौर श्रीमति बैजन्ती देवी खेड़िया ने भी पर्यावरण संतुलन हेतु जल संचयन एवं अधिकांश वृक्षारोपण की आवश्यकता पर बल दिया।
उप विकास आयुक्त डॉ. कारी प्रसाद महतो ने जिला में जल जीवन हरियाली कार्यक्रम कार्य योजना पर विस्तार से प्रकाश डाला। सभा का संचालन डीआरडीए के निदेशक मो. वशीम अहमद ने किया।

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