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September 10, 2019

क्या प्रधानमंत्री से प्रेरित गोपालजी पार्टी कार्यक्रमो की जगह जनता के कार्यो को देंगे तरजीह!

दरभंगा।अभिषेक कुमार
जनप्रतिनिधि पार्टी का कार्य पार्टी पदाधिकारियों पर छोड़ खुद जनता के कार्यो में समय दें तो कार्य भी तीव्र गति से होगा और इसका फायदा उनके पार्टी को भी मिलेगा। शायद संगठन में पदधारी पार्टी के कार्य केलिए बनाये जाते हैं और जनप्रतिनिधि जनता के कार्य केलिए। पार्टी के किसी बड़े कार्यक्रम में कभी कभार जनप्रतिनिधि उपस्थित हों तो ठीक है। पर पार्टी के कार्यों में लगे रहकर जनता के कार्य केलिए समय की कमी बताना निश्चित रूप से अजीब तर्क लगता है। जबकि उनके दल के ही प्रधानमंत्री होने के वाबजूद पार्टी कार्यक्रमो में समय देने की जगह प्रधानमंत्री के कार्यो में अपना समय देते हैं। कोई भी जनप्रतिनिधि जो चुने जाते हैं, वे पार्टी के कार्य केलिए नही, बल्कि जनता के कार्य केलिए चुने जाते हैं। प्रधानमंत्री भी अपने सांसदों को अक्सर संदेश देते सुने जाते हैं कि उन्हें जनता ने कार्य करने केलिए चुना है। जनता का कार्य करें।परंतु जीते प्रतिनिधि जीतने के बाद शायद पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ में रहकर खुद की शेखी बघारते रहने में ज्यादा आनंद महसूस करते हैं।

बात करें तो दरभंगा के उम्मीदों के तारे, जमीनी नेता के रूप में पहचाने जानेवाले दरभंगा के वर्तमान सांसद गोपालजी ठाकुर को भी जनता ने पलको पर बिठाया। शहर में आवास रहने और रेलवे गुमटी के पार रहने के कारण आमजन के साथ साथ चुनाव से पहले गोपालजी ठाकुर को भी ओवरब्रिज नही बनना अजीब लगता था और कहते थे कि वे सांसद बनने के सौ दिन अंदर ओवरब्रिज का निर्माण शुरू करवाएंगे। शहर के उनका सबसे पहला कार्य होगा ओवरब्रिजों का निर्माण शुरू करवाना। परंतु अब हालत बदल चुके हैं। सांसद बनते ही गोपालजी ठाकुर पहले की तरह दरभंगा स्थित आवास पर से ज्यादा जाना आना नही होता। अधिकांश समय दिल्ली पटना ही बीता है और दरभंगा में भी प्रवास के दौरान उनके लिए अधिकतम ठहराव स्थल सर्किट हाउस ही रहा। जितने समय भी रहे हैं, जनता में कार्यो में समय की कमी इन्हें होना लाजिमी है। क्योंकि संगठन के कार्यो में इन्होंने ज्यादा समय दिया है। जबकि पार्टी का प्रचार तो जनप्रतिनिधि जनता के कार्यो में दिनरात लगकर कर सकते हैं। पार्टी के कार्यो केलिए तो पार्टी निचले स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठनात्मक ढांचा बनाये रखता है। परंतु यदि जनप्रतिनिधि यदि खुद को पार्टी की जगह जनता का प्रतिनिधि होने की मानसिकता बना ले तो निश्चित रूप से कार्यो की गति तीव्र होगी और जनप्रतिनिधि को पार्टी के कार्यो में व्यस्त रहने का हवाला नही देना पड़ेगा। जनता का कार्य तीव्र गति से करके सभी दलों के समर्थक जनता का भी प्यार हासिल किया जा सकता।

(उपरोक्त आलेख लेखक के निजी आकलन पर आधारित है।)

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