Home Featured नवजात को जन्म के बाद एक घंटे के भीतर स्तनपान कराना जरूरी: डॉ पंकज।
January 17, 2020

नवजात को जन्म के बाद एक घंटे के भीतर स्तनपान कराना जरूरी: डॉ पंकज।

दरभंगा: नवजात व मां के मृत्यु दर को कम करने को लेकर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हो गया. अंतिम दिन स्टेट रिर्सोस यूनिट के डॉ पंकज कुमार मिश्रा, डॉ एहतेसाम आलम व डॉ प्रभात कुमार ने विभिन्न प्रखंडों से आये चिकित्सकों को नवजात व मां के मृत्यु दर को कम करने के लिये चिकित्सयीय पहलु के बारे में विस्तार से बताया. इस दौरान प्रशिक्षकों ने चिकित्सकों को नवजात को जन्म के एक घंटा के भीतर स्तनपान की महत्ता बतायी. साथ ही नवजात से संबंधित विभिन्न रोग व उसके उपचार को लेकर ट्रेनिंग दिया. या. डॉ पंकज ने बताया कि जन्म के शुरूआती दो घंटा तक नवजात अधिक सक्रिय रहते हैं. इसलिये एक घंटे के भीतर ही नवजात को स्तनपान शुरू कराना जरूरी है. छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान ही कराया जाना चाहिए. दूसरी कोई भी चीज उसको आहार में नहीं देना चाहिये. इस दौरान नवजात को पानी भी नहीं देना चाहिये. डॉ मिश्रा ने प्रशिक्षु चिकित्सकों को अस्पताल में आने वाली महिलाओं को स्तनपान का महत्व बताने की बात कही. कहा कि प्रसव के बाद माता के स्तन में शुरूआती समय में एक चम्मच से अधिक दूध नहीं बनता है. यह दूध गाढ़ा एवं पीला होता है, जिसे क्लोसट्रूम कहा जाता है. इसके सेवन से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. इससे बच्चे का निमोनिया एवं डायरिया जैसे गंभीर रोगों में भी बचाव होता है.
स्तनपान कराने वाली मां की संख्या में हुआ इजाफा
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार वर्ष 2005- 06 में बिहार में केवल चार प्रतिशत नवजात को एक घंटे के भीतर स्तनपान कराया जाता था. लेकिन वर्ष 2015-16 में स्तनपान का आकड़ा बढ़कर लगभग 35 प्रतिशत हो गई. लेंसेट 2008 रिर्पोट के अनुसार छह माह तक केवल स्तनपान नहीं करने वाले बच्चों में छह माह तक केवल स्तनपान करने वाले बच्चों की तुलना में पहले छह महीने में 14 गुना अधिक मृत्यु की सम्भावना रहती है. लेसेंट 2015 रिर्पोट के तहत संक्रमण से होने वाले 88 प्रतिशत बाल मृत्यु दर में स्तनपान से बचाव होता है. सम्पूर्ण स्तनपान से शिशुओं में 54 प्रतिशत डायरिया के मामलों में कमी आती है. स्तनपान से शिशुओं में 32 प्रतिशत श्वसन संक्रमण के मामलों में कमी आती है. शिशुओं में डायरिया के कारण अस्पताल में भर्ती होने के 72 प्रतिशत मामलों में स्तनपान बचाव करता है. शिशुओं में श्वसन संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के 57 प्रतिशत मामलों में स्तनपान बचाव करता है. एवं बेहतर स्तनपान एक साल में विश्व स्तर पर 8. 20 लाख बच्चों की जान बचाता है.

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