Home Featured महान स्वप्नदृष्टा थे ललित बाबू, भारतीय राजनीति में छोड़ी अमिट छाप: प्रो0 रत्नेश्वर मिश्र।
February 2, 2020

महान स्वप्नदृष्टा थे ललित बाबू, भारतीय राजनीति में छोड़ी अमिट छाप: प्रो0 रत्नेश्वर मिश्र।

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दरभंगा: रविवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय नरगोना परिसर स्थित जुबली हॉल में स्व ललित नारायण मिश्र की 98 जयंती मनाया गया । कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता इतिहास के मर्मज्ञ विद्वान प्रॉफ़ेसर रत्नेश्वर मिश्र ने ललित बाबू के बारे में ‌कहा कि ललित बाबू के पिता 5 वर्ष की अवस्था में ही ललित बाबू से कहा करते थे कि ” सपूत वही जो कोसी बनावे और सपूत वही जो रेल चलावे”। अपने पिता के इस वाक्य को उन्होंने पूरा कर दिखाया। उन्होंने कहा कि कोसी के 30 किलोमीटर का बांध भारत सेवक समाज के स्वयंसेवकों द्वारा निर्माण किया गया जिसका नेतृत्व ललित बाबू ने किया था। उन्होंने आगे कहा कि मेरे पिता स्व मदनेश्वर मिश्र एवं ललित बाबू एक ही साथ टी एन बी कॉलेज भागलपुर में पढ़ते थे ।ललित बाबू के नाम से यह विश्वविद्यालय बना और जिस समय उनका नाम विश्वविद्यालय से हटाया गया इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति मेरे पिता स्वर्गीय मदनेश्वर मिश्र ने अपना त्यागपत्र राजभवन को सौंप दिया। ललित बाबू के विषय में उन्होंने कहा कि वे एक विलक्षण, कल्पनाशील ,स्वप्नद्रष्टा, समाजवादी, महामानव थे । उन्होंने ही रेलवे से थर्ड क्लास को हटाया। आगे अपने संबोधन में उपस्थित लोगों से कहा कि यह विश्वविद्यालय जिस परिसर में चल रहा है वह राज दरभंगा का है इसीलिए राज परिवार को भी हमें ऐसे अवसरों पर याद करना चाहिए । उन्होंने ईच्छा जाहिर की कि ललित बाबू को भारत रत्न की उपाधि मिलनी चाहिए । कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार सिंह ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि ललित बाबू ने भारतीय राजनीतिक पटल पर अमित छाप छोड़ा है ।मिथिलांचल के स्वप्नद्रष्टा के साथ-साथ सपनों को साकार करने की क्षमता उनमें थी। इससे आज के नवयुवकों को सीख लेनी चाहिए ।उन्होंने कहा कि 2022 में ललित बाबू की 100वीं जयंती के साथ-साथ इस विश्वविद्यालय के स्थापना के 50 वर्ष पूरा होने पर स्वर्ण जयंती मनाया जाएगा। मैं ना रहूंगा परंतु कोई भी कुलपति आयेंगे तो विश्वविद्यालय परिवार मिलकर इसको मूर्त रूप देंगे। बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री बिहार सरकार एवं सर्व ललित बाबू के भतीजा श्री नीतीश मिश्रा ने कहा की जितने कम समय में ललित बाबू ने ख्याति प्राप्त की आज भी यहां के जनमानस में वे व्याप्त हैं । उनके शिष्टाचार, राजनीतिक संबंध आज भी अनुकरणीय है। कार्यक्रम का आरंभ स्नातकोत्तर संगीत विभाग की छात्राओं के स्वागत गान से आरंभ हुआ । सर्वप्रथम कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। तत्पश्चात प्रतिकुलपति प्रोफ़ेसर जय गोपाल ने अपने संबोधन में कहा कि ललित बाबू ने विकास कार्यों के संदर्भ में बिहार को राष्ट्रीय फलक पर लाया। पूर्व विधान पार्षद प्रो विनोद चौधरी ने कहा कि ललित बाबू विकास पुरुष थे इसलिए उनके नाम से यह विश्वविद्यालय है। इसका सर्वांगीण विकास में सभी व्यक्तियों को सहयोग करना चाहिए। विधान पार्षद प्रो दिलीप चौधरी ने ललित बाबू को बिहार के सपूत एवं मिथिला क गौरव कहा । विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर अनिल कुमार झा ने अपने संबोधन में कहा कि चाणक्य की राज्य कुशलता ललित बाबू में विद्यमान थी । विदेश व्यापार मंत्री के रूप में उन्होंने मिथिला पेंटिंग को राष्ट्रीय/ अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अशोक कुमार मेहता ने किया ।इस अवसर पर संकायाध्यक्ष मानविकी प्रो प्रिती झा , संकायाध्यक्ष ललित कला संकाय प्रो पुष्षम नारायण , हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो चन्द्रभानू प्रसाद सिंह ,दर्शन शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो मनोज कुमार झा, अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो रतन कुमार चौधरी कुलानुशासक डा सुरेंद्र कुमार सुमन ,कई शिक्षक ,पदाधिकारी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे।

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