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February 5, 2020

तीन दिनों में कुआँ एवं तालाबों का अंतिम सर्वेक्षण प्रतिवेदन करायें उपलब्ध: डीएम।

दरभंगा: जल-जीवन-हरियाली अभियान अन्तर्गत जिला में अवस्थित प्राकृतिक जल श्रोतों की पहचान कर इसका जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसके साथ ही नये जल श्रोतों का सृजन करने की दिशा में भी कारवाई चल रही है। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने सभी संबंधित एजेंसियों को प्राकृतिक जल श्रोतों के जीर्णोद्धार एवं नये जल श्रोतों के सृजन कार्यों का तीव्र गति से क्रियान्वयन करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान में कुल 10 अवयव हैं। सभी अवयवों में राज्य स्तर पर जिले की रैकिंग की जा रही है। दरभंगा जिला की रैकिंग को सुधारने हेतु सभी अवयवों में प्रगति लानी होगी। वे बुधवार को कार्यालय प्रकोष्ठ में जल-जीवन-हरियाली अभियान की समीक्षा बैठक में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि सभी सार्वजनिक एवं निजी जल श्रोतों की पहचान कर इसका जीर्णोद्धार किया जायेगा। इस हेतु कुआँ/तालाब आदि का भौतिक सर्वेक्षण करने का निदेश सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, पी.ओ. मनरेगा एवं पी.एच.ई.डी. को दिया गया था। सर्वेक्षण प्रतिवेदन की समीक्षा में पाया गया कि अनुमानित जल श्रोतों की संख्या से इसमें कम संख्या प्रतिवेदित हुए है।
जिलाधिकारी ने सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, पीओ मनरेगा एवं पीएचईडी के अभियंता को पुनः तीन दिनों के अंदर अंतिम रूप से सभी सार्वजनिक एवं निजी कुओं का सर्वेक्षण करके अंतिम प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया है। कहा कि भौतिक सर्वेक्षण प्रतिवेदन में राजस्व विभाग के अभिलेख से मिलान कर ली जाये।
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित कुओं का जीर्णोद्धार कार्य लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमण्डल द्वारा किया जाएगा। जबकि नगर निकाय क्षेत्र के कुओं का जीर्णोद्धार नगर विकास विभाग के द्वारा किया जाना है।
बैठक में उप विकास आयुक्त, डॉ. कारी प्रसाद महतो द्वारा बताया गया कि चापाकल, कुआँ एवं अन्य जल श्रोतों के निकट सोख्ता बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। बताया कि 2437 सोख्ता का निर्माण पूर्ण हो गया है।
पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता द्वारा बताया गया कि 36 कुओं का जीर्णोद्धार पूरा कर दिया गया है और वर्त्तमान में 55 कुओं का जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ किया गया है। जिलाधिकारी ने कार्यपालक अभियंता को और 288 चिन्ह्ति कुओं का जीर्णोद्धार कार्य भी प्रारंभ करने का निदेश दिया है।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति/जनजाति बहुल्य टोलों में प्राथमिकता के आधार पर कुओं का जीर्णोद्धार किया जाये। कहा कि लघु सिंचाई प्रमण्डल के द्वारा 01 एकड़ से अधिक रकबा वाले तालाबों का जीर्णोद्धार कार्य किया जा रहा है एवं 01 एकड़ से कम वाले तालाबों का जीर्णोद्धार मनरेगा योजना के तहत किया जा रहा है।
जल-जीवन-हरियाली अभियान का एक अहम पार्ट वर्षाजल का संचयन है। इसके तहत वर्त्तमान में सरकारी भवनों में छत वर्षा जल संचयन संयत्र लगाने का कार्य प्रगति में है। भवन संरचना प्रमण्डल के कार्यपालक अभियंता द्वारा बताया गया कि 3000 वर्ग फीट एवं इससे अधिक क्षेत्रफल वाले सरकारी भवनों में छत वर्षाजल संचयन का कार्य उनके द्वारा किया जा रहा है। इसमें 142 भवनों में से 119 सरकारी भवनों में छत वर्षा जल संचयन संयत्र संस्थापित कर दिया गया है। मनरेगा योजना के तहत 121 भवनों में छत वर्षा जल संचयन संयत्र संस्थापित किया गया है। शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के भवनों में छत वर्षा जल संचयन की प्रगति अत्यंत असंतोषजनक पाई गई। जिलाधिकारी ने डी.पी.ओ. समग्र शिक्षा को 100 भवनों में तुरंत छत वर्षा जल संचयन संयत्र लगाने का कार्य प्रारंभ करने का सख्त हिदायत दिया गया है। जबकि प्रभारी सिविल सर्जन को अद्यतन प्रगति की जानकारी देने को कहा गया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि अगले हफ्ते प्रखण्डवार जल-जीवन-हरियाली अभियान के सभी अवयवों के प्रगति की समीक्षा करेंगे।
इस बैठक में उप विकास आयुक्त डॉ. कारी प्रसाद महतो, अपर समाहर्त्ता विभूति रंजन चौधरी, डी.पी.ओ. (शिक्षा) संजय देव कन्हैया, जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी सुशील कुमार शर्मा, जिला कृषि पदाधिकारी समीर कुमार, डी.पी.एम. जीविका मुकेश कुमार, प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश गुप्ता, कार्यपालक अभियंता, भवन संरचना प्रमण्डल दिलीप कुमार, कार्यपालक अभियंता पी.एच.ई.डी/जल संसाधन/ग्रामीण कार्य प्रमण्डल/लघु सिंचाई आदि उपस्थित थे।

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